इन दिनों हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री में बॉक्स ऑफिस पर सफलता का फॉर्मूला लगातार चर्चा में बना हुआ है। जहां एक ओर बड़े बजट और स्टार पावर वाली फिल्मों पर दांव लगाया जा रहा है, तो दूसरी ओर साउथ फिल्मों की कहानी, एक्शन और ट्रीटमेंट को हिंदी दर्शकों के बीच भी काफी पसंद किया जा रहा है। इसी बीच हिंदी सिनेमा की सफलता को लेकर ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर 'रितेश सिधवानी' ने अपनी राय रखी है।
मुंबई। इन दिनों हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री में बॉक्स ऑफिस पर सफलता का फॉर्मूला लगातार चर्चा में बना हुआ है। जहां एक ओर बड़े बजट और स्टार पावर वाली फिल्मों पर दांव लगाया जा रहा है, तो दूसरी ओर साउथ फिल्मों की कहानी, एक्शन और ट्रीटमेंट को हिंदी दर्शकों के बीच भी काफी पसंद किया जा रहा है। इसी बीच हिंदी सिनेमा की सफलता को लेकर ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर ‘रितेश सिधवानी’ ने अपनी राय रखी है।
रितेश सिधवानी का कहना है कि किसी एक इंडस्ट्री की फिल्मों को देखकर उसके फॉर्मूले को हूबहू कॉपी करना ज्यादा दिनों तक काम नहीं करता। उनके मुताबिक, दर्शकों की पसंद और बदलते सिनेमाई ट्रेंड को समझना भी बहुत जरूरी है। साउथ की फिल्मों की सफलता से सीख ली जा सकती है, लेकिन हिंदी दर्शकों के हिसाब से उसे अपनी कहानी और ट्रीटमेंट में ढालना ज्यादा अहम है।
सिर्फ कॉपी करने से नहीं मिलेगी सफलता
प्रोड्यूसर के मुताबिक, साउथ सिनेमा की सफलता के पीछे सिर्फ एक्शन या बड़े स्टार के अलावा कहानी, किरदार, इमोशन और दर्शकों से कनेक्शन भी बड़ी वजह हैं। इस तरह से यदि हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री सिर्फ साउथ में सफल हो रहे फॉर्मूले को कॉपी करेगी, तो जरूरी नहीं कि वही परिणाम यहां भी देखने को मिलें। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि आज का दर्शक पहले से ज्यादा समझदार और कंटेंट को लेकर काफी सजग है। वह ऐसी कहानी देखना चाहता है, जो उसे एंटरटेन करने के साथ भावनात्मक रूप से भी जोड़ सके।
OTT ने बदली दर्शकों की पसंद
ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव ने भी दर्शकों की पसंद को काफी बदला है। ‘मिर्जापुर’ जैसी वेब सीरीज ने दिखाया है कि मजबूत किरदार और दिलचस्प कहानी दर्शकों को काफी लंबे समय तक जोड़कर रख सकती है। यहीं कारण है कि अब फिल्ममेकर्स के सामने चुनौती सिर्फ बड़े स्टार या बड़े बजट की फिल्म बनाने की नहीं, बल्कि कुछ ऐसा कंटेंट तैयार करने की है जिसे दर्शक सिनेमाघर तक जाकर देखना चाहें।
यानी ‘मिर्जापुर’ के प्रोड्यूसर की बातों से यह संकेत मिलता है कि बॉक्स ऑफिस पर सफलता प्राप्त करने के लिए साउथ की फिल्मों की नकल करने से ज्यादा जरूरी है, दर्शकों की नब्ज समझना और अपनी कहानी को मजबूत बनाना।