Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. दुनिया
  3. नेपाल का ‘रॉकस्टार’ क्यों विलेन बना? बालेन शाह के खिलाफ भी काठमांडू की सड़कों पर उतरे लोग

नेपाल का ‘रॉकस्टार’ क्यों विलेन बना? बालेन शाह के खिलाफ भी काठमांडू की सड़कों पर उतरे लोग

By santosh singh 
Updated Date

काठमांडू: नेपाल में बालेन शाह (Balen Shah) की सरकार के खिलाफ भी युवाओं का गुस्सा फूटने लगा है। पिछले साल Gen-Z प्रदर्शन के बाद युवाओं ने केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की सरकार उखाड़ फेंकी थी। इसके बाद इस साल हुए चुनाव में बालेन शाह (Balen Shah) के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने जबरदस्त जीत हासिल की और वो प्रधानमंत्री बने। बालेन शाह (Balen Shah)  के पास नेपाली संसद (Nepalese Parliament) के हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स (House of Representatives) में दो-तिहाई बहुमत है।

पढ़ें :- अमेरिका जल्द जारी करेगा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर वाले 250 डॉलर का नोट! बदलेगा 150 साल पुराना नियम

लेकिन अब बालेन शाह (Balen Shah)  को जनता के भारी गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। रविवार (12 जुलाई) को सैकड़ों लोग नेपाल के प्रधानमंत्री और उनकी नीतियों के खिलाफ विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आए। राजधानी में मौजूद सरकारी दफ्तर सिंहदरबार सचिवालय के बाहर सैकड़ों लोग जमा हुए। लोगों के हाथों में पोस्टर्स थे जिन पर लिखा था ‘गरीबों पर जुल्म बंद करो, मानवाधिकार का सम्मान करो, गैर-कानूनी गिरफ्तारी रोको और बेघर लोगों को रहने का जगह दो।’

नेपाल में बालेन सरकार के खिलाफ गुस्सा क्यों है?

काठमांडू में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की मुख्य वजह बालेन शाह का नदी किनारे बनी अवैध बस्तियों को हटाने का फैसला है। बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर हुआ करते थे उसी समय से इस काम पूरा करना चाहते थे। ये वो जमीन विहीन लोग हैं जिनके पास देश में कहीं और जमीन नहीं है और ये जमीन खरीद भी नहीं सकते हैं। नेपाल कानून में इन्हें ‘कब्जेदार’ कहा जाता है। 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक काठमांडू घाटी के तीन जिलों में नदी के किनारे लगभग 3,466 परिवार अनौपचारिक रूप से बसे हुए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा कर रखा है।

बालेन शाह अब इन कब्जेदारों को काठमांडू से हटाने के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने नदी किनारे बसी बस्तियों के आस-पास बड़ी संख्या में पुलिस और सेना तैनात की है। जिसके बाद अब वहां रहने वाले कई कब्जेदाकर अपनी मर्जी से जगह छोड़ रहे हैं। हालांकि इसके कारण कई लोग बेघर हो गए हैं जिनमें बुज़ुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। कई कब्जेदारों ने न सिर्फ रहने की जगह खो दी है बल्कि अपनी कमाई का जरिया भी गंवा दिया है। नेपाल सरकार ने इनके रहने की कोई और व्यवस्था नहीं की है।

पढ़ें :- अमेरिकी राजनीति में बड़ा भूचाल, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश, ईरान के मिनाब में गर्ल्स स्कूल पर हमले को बताया 'वॉर क्राइम'

नेपाली कानून का उल्लंघन कर रहे बालेन शाह

नेपाल कानून के मुताबिक इन बेघरों को हटाने से पहले इन्हें रहने के लिए किसी और जगह का विकल्प दिया जाना जरूरी था लेकिन बालेन सरकार ने ऐसा नहीं किया। बेदखली अभियान के दौरान जिन 2,600 परिवारों के घर तोड़े गए हैं उनमें से सिर्फ 325 परिवारों को काठमांडू के अलग-अलग इलाकों में बने अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में रहने की जगह दी गई है। इसके अलावा बालेन सरकार ने 2 जुलाई को इन लोगों को 6 जुलाई तक होल्डिंग सेंटर भी खाली करने का आदेश दिया है। कम से कम 60 परिवारों ने सेंटर छोड़ने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।

इसके बाद से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यह मामला रविवार (12 जुलाई) को तब और गंभीर हो गया जब काठमांडू के माइतीघर में सैकड़ों बेज़मीन लोग और कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। वे हाल ही में बेदखली की कार्रवाई के दौरान विस्थापित हुए परिवारों के लिए उचित बसावट और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। ‘यूनाइटेड नेशनल स्क्वाटर्स फ्रंट’ के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने बिना कोई उचित विकल्प दिए लोगों के घर गिरा दिए हैं।

प्रदर्शनकारियों पर थर्ड डिग्री के इस्तेमाल का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने कई लोगों को गिरफ्तार किए जाने और उनपर थर्ड डिग्री इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। अब प्रदर्शनकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को रिहा करने की भी मांग की। इससे पहले विस्थापित परिवारों के प्रबंधन को लेकर हुए विवाद के बाद नेपाली पुलिस (Nepal Police) ने कीर्तिपुर के एक होल्डिंग सेंटर में माजिद अंसारी और सरिश्मा थापा समेत तीन युवा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था। अधिकारियों का दावा था कि भारी बारिश के कारण अस्थायी शेल्टर में पानी भरने के बाद बचाव अभियान के दौरान इन कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों के काम में बाधा डाली थी।

पढ़ें :- Balen Shah: नेपाल में नए राजनीतिक की शुरूआत, रैपर-इंजीनियर से अब सबसे युवा प्रधानमंत्री बने बालेन शाह

 

 

Advertisement