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Women Reservation Bill : प्रियंका गांधी, बोलीं- कांग्रेस सरकार ने आजादी के बाद पहले दिन से महिलाओं को दिलाया वोट का अधिकार, अमेरिका लगे थे 150 साल

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव व वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का हवाला देते हुए केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि 1928 में मोतीलाल नेहरू द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में ही महिलाओं के समान अधिकारों की नींव रख दी गई थी, जिसे बाद में कराची अधिवेशन में पारित किया गया। प्रियंका ने कहा कि इसी ‘वन वोट वन वैल्यू’ के सिद्धांत के कारण भारतीय महिलाओं को आजादी के पहले दिन से ही वोट का अधिकार मिला जबकि अमेरिका जैसे देशों को इसमें 150 साल लग गए। उन्होंने आधुनिक दौर में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को निर्णायक भूमिका में लाने का प्रयास किया है।

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महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण कांग्रेस के डीएनए में है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले नेहरू परिवार ने की थी

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने इतिहास के पन्नों से भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने हर बात में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू को घसीटने वाला तंज कसते हुए चुटकी लेते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय महिलाओं को आजादी के पहले दिन से वोटिंग का हक दिलाने की नींव एक नेहरू ने ही रखी थी। जवाहरलाल नेहरू नहीं बल्कि मोतीलाल नेहरू ने 1928 की अपनी रिपोर्ट में रख दी थी। प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस की इसी ‘वन वोट वन वैल्यू’ की सोच के कारण भारत ने अमेरिका से भी पहले महिलाओं को समान अधिकार दिए। उन्होंने भाजपा को याद दिलाया कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण कांग्रेस के डीएनए में है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले नेहरू परिवार के पूर्वजों ने की थी।

संसद में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। शाह को आज के युग का चाणक्य करार देते हुए प्रियंका ने तंज कसा कि वह विपक्ष से चर्चा किए बिना ही चुपचाप अपनी पूरी योजना बना लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह बिल बिना किसी ठोस तैयारी के लेकर आई है। प्रियंका ने सवाल उठाया कि जब मंशा साफ है तो वर्तमान की 543 सीटों में से ही तत्काल महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही तो ऐसे फैसलों से लोकतंत्र की मूल भावना खारिज हो जाएगी।

महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने कहा, सबसे पहले महिला आरक्षण की बात कांग्रेस ने की थी। उन्होंने कहा कि कराची अधिवेशन में इस पर प्रस्ताव पास किया था। उन्होंने कहा कि उस वक्त राजीव गांधी ने ये प्रस्ताव पास किया था और उस समय बीजेपी ने इसका विरोध किया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर चर्चा की लेकिन ये नहीं बताया कि उस समय इसका विरोध किसने किया था।

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जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए। हम सहमत हैं। इसे लागू करने के लिए सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ानी पड़ेगी और 850 कर दी जाएगी। इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो सीटों को बढ़ाने के लिए काम करेगा।  राजनीतिक की बू, जिसका जिक्र पीएम ने किया वह इसमें पूरी तरह मिली हुई है। 2023 में जो विधेयक पारित कराया गया था, उसमें दो चीजें थीं, जो इसमें नहीं हैं। उसमें नई जनगणना और परिसीमन का जिक्र था। अब क्या हो गया। मन बदल गया। पुराने आंकड़ों के आधार पर क्यों आगे बढ़ना चाह रही सरकार। जल्दबाजी क्यों। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता है।

प्रियंका ने ओबीसी की अनदेखी का लगाया आरोप
प्रियंका गांधी बोलीं, पीएम ने हल्के में बोल दिया कि इस वर्ग और उस वर्ग के बारे में बाद में देखेंगे। ये हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह बड़ी संख्या है। यह पूरे वर्ग का संघर्ष है। इसे तकनीकी मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ लिया। हम इनकी जरूरतों को आगे कर रहे हैं। हम उनका हक मांग रहे हैं। पीएम ने इसे तकनीकी मुद्दा बता दिया। वे किस बात से घबरा रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि जब जातीय जनगणना होगी तो उन्हें पता चलेगा कि ओबीसी वर्ग कितना बडा है और इसका हक कोई नकार नहीं पाएगा। पीएम इस विधेयक के जरिए ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहते हैं।

कांग्रेस सांसद बोलीं कि इस देश को किसी एक का हक छीन कर नहीं चलाया जा सकता। इसमे संसद का 50 फीसदी विस्तार बताया गया है। लेकिन परिवर्तन के नियम के बारे में पूरे विधेयक में कोई शर्त नहीं है। 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर रोक लगाई गई थी। अब इसे पूरी तरह बदलने की कोशिश की जा रही है। इस बड़े परिवर्तन के लिए भारत में पूरी प्रक्रिया बनी हुई है, लेकिन वे इस प्रक्रिया का पालन नहीं करना चाहते।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा,कि कुछ प्रदेशों की ताकत कम कर के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाकर अपनी पार्टी की मजबूती तय की जा रही है। इन्होंने पूरी योजना बना ली है। अचानक प्रदेश में चुनाव के दौरान बैठक बुलाओ, कोई सर्वदलीय बैठक न करो। विधेयक का प्रारूप एक दिन पहले ही जारी करो। मीडिया में चर्चा शुरू कराओ। बेचारे मोदीजी इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं ऐसी बातें चलाई जाती हैं। यह कर कर के विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की कोशिश की जाती है। एक तरफ महिला आरक्षण लाना और दूसरी तरफ काट पीट करने की स्वतंत्रता, पूरे ढांचे को बदलने की स्वतंत्रता और ओबीसी वर्ग के हक को खत्म करने की स्वतंत्रता हासिल करना। यह सत्ता बनाए रखने का एक कमजोर बहाना है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार मौजूदा 543 सीटों में ही 33 फीसदी आरक्षण का एलान क्यों नहीं कर देती। इससे आपका काम भी हो जाएगा और काला टीका (विपक्ष का विरोध) भी काम आ जाएगा। मैं प्रधानमंत्री महोदय जी को कहना चाहती हूं कि अगर वे ईमानदारी से इस कदम को उठाते तो पूरा सदन उनके साथ खड़े होकर इसका समर्थन करता। प्रधानमंत्री जी अगर महिलाओं का सम्मान करते हैं तो उनका राजनीतिक इस्तेमाल न करें। हम आपके तीनों विधेयकों का सख्त विरोध करते हैं, लेकिन अब भी आप ऐसा निर्णय ले सकते हैं, जो सर्वसम्मति से सदन में पारित हो जाएगा और हमारी नारी शक्ति को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल जाएगा।

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