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बांग्लादेश में तख्तापलट! मोहम्मद यूनुस उस्मान हादी के कातिल पकड़ो या गद्दी छोड़ो, इंकलाब मंच की धमकी

By santosh singh 
Updated Date

ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान दस्तक देने जा रहा है। शेख हसीना (Sheikh Hasina) की सरकार के पतन के बाद देश की कमान संभालने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस (Nobel laureate Muhammad Yunus) अब खुद एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़े हैं। जिस छात्र शक्ति और क्रांतिकारी संगठनों ने उन्हें उम्मीद की किरण मानकर सत्ता के शीर्ष पर बैठाया था, अब वही संगठन उनके तख्तापलट की तैयारी कर रहे हैं।

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उस्‍मान हादी (Usman Hadi) के कात‍िलों की ग‍िरफ्तारी न होने से नाराज इंकलाब मंच ने धमकी दी है क‍ि अगर कात‍िल नहीं पकड़े गए तो यूनुस को जाना होगा। इंकलाब मंच के प्रवक्ता ने कहा कि उस्मान हादी (Usman Hadi) की हत्या के मामले में अगर तुरंत न्याय नहीं मिला, तो वे इस अंतरिम सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। ढाका की सड़कों पर फिर से वही नारे गूंजने लगे हैं जो कुछ महीने पहले हसीना सरकार के खिलाफ गूंजते थे, लेकिन इस बार निशाना यूनुस सरकार (Yunus Government) है।

दो हफ्ता बीतने के बावजूद कात‍िलों का सुराग नहीं मिलने पर इंकलाब मंच उग्र है। सोमवार को इंकलाब मंच (Inquilab Manch) के पदाध‍िकार‍ियों ने बड़ी बैठक की और इसमें यूनुस सरकार (Yunus Government) को साफ साफ अल्‍टीमेटम दे द‍िया। ‘इंकलाब मंच’ (Inquilab Manch)  के प्रवक्ता और प्रमुख युवा नेता उस्मान हादी (Usman Hadi) की कुछ दिनों पहले निर्मम हत्या कर दी गई थी। उस्मान हादी उन चेहरों में से एक थे जिन्होंने बांग्लादेश में बदलाव की बयार लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी हत्या ने न केवल उनके संगठन को, बल्कि पूरे देश के युवा वर्ग को झकझोर कर रख दिया है।

हत्या के बाद इंकलाब मंच (Inquilab Manch) ने सरकार को कातिलों को पकड़ने के लिए एक निश्चित समय-सीमा दी थी। लेकिन, वह समय-सीमा अब समाप्त हो चुकी है और पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। इसी बात से नाराज होकर इंकलाब मंच ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन का कहना है कि सरकार अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रही है या फिर प्रशासन पूरी तरह से नकारा हो चुका है।

कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार रहें यूनुस

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इंकलाब मंच (Inquilab Manch) के तरफ से बुलाई गई एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध सभा में वक्ताओं ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। मंच के नेताओं ने एक सुर में कहा कि उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो इंकलाब मंच (Inquilab Manch) अंतरिम सरकार को सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन शुरू करेगा। हम सरकार बनाना जानते हैं, तो सरकार गिराना भी हमें आता है।

यूनुस के ल‍िए खतरे की घंटी

यह बयान मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के लिए खतरे की घंटी है। बांग्लादेश का हालिया इतिहास गवाह है कि जब वहां के छात्र और युवा संगठन किसी मुद्दे पर एकमत हो जाते हैं, तो बड़ी से बड़ी सत्ताएं भी नहीं टिक पातीं। इंकलाब मंच (Inquilab Manch) ने आरोप लगाया है कि डॉ. यूनुस की सरकार, जिसे कानून का राज स्थापित करने के लिए लाया गया था, वह अपने ही समर्थकों की सुरक्षा करने में विफल रही है।

गृह सलाहकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल

इंकलाब मंच (Inquilab Manch)  का गुस्सा केवल डॉ. यूनुस पर ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से गृह मंत्रालय और पुलिस प्रशासन पर है। संगठन ने अपने बयान में कहा कि समय-सीमा बीत जाने के बावजूद गृह सलाहकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उस्मान हादी के हत्यारों के बारे में सुराग होने के बावजूद पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उनका आरोप है कि गृह सलाहकार इस मामले की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं। मंच ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन के भीतर अब भी पुराने शासन के वफादार बैठे हैं जो जानबूझकर जांच को भटका रहे हैं? या फिर मौजूदा सरकार अपराधियों के सामने घुटने टेक चुकी है? मंच के सदस्यों ने कहा कि जब उस्मान हादी जैसे प्रमुख चेहरे सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? यह विफलता सीधे तौर पर अंतरिम सरकार की प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है।

क्या फिर जल उठेगा बांग्लादेश?

इंकलाब मंच (Inquilab Manch)  की धमकी को महज कोरी बयानबाजी नहीं माना जा सकता। उस्मान हादी की हत्या के बाद से युवाओं में जो आक्रोश है, वह कभी भी एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। इंकलाब मंच (Inquilab Manch)  ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है क‍ि यदि हत्यारे नहीं पकड़े गए, तो वे सरकारी कामकाज को ठप कर देंगे। ढाका में शक्ति प्रदर्शन और प्रमुख सरकारी इमारतों का घेराव करेंगे। यूनुस सरकार (Yunus Government)  के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएंगे और नई व्यवस्था की मांग करेंगे। बांग्‍लादेश की राजनीत‍ि के जानकारों का मानना है कि अगर इंकलाब मंच सड़कों पर उतरता है, तो अन्य असंतुष्ट समूह भी उनके साथ जुड़ सकते हैं। इससे देश में फिर से अराजकता का माहौल बन जाएगा, जिससे निपटना यूनुस सरकार के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।

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