एक बार फिर से उत्तर प्रदेश के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राज्य के तीन होनहार युवाओं ने मिलकर एक ऐसा घातक ड्रोन तैयार किया है, जिसे तकनीकी गलियारों में 'दिव्यास्त्र' का नाम दिया गया है। इसे लखनऊ स्थित एक डिफेंस स्टार्टअप HoverIt ने विकसित किया है, जिसके संस्थापक पवन पांडे (24 वर्ष) हैं।
लखनऊ। एक बार फिर से उत्तर प्रदेश के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। राज्य के तीन होनहार युवाओं ने मिलकर एक ऐसा घातक ड्रोन तैयार किया है, जिसे तकनीकी गलियारों में ‘दिव्यास्त्र’ का नाम दिया गया है। इसे लखनऊ स्थित एक डिफेंस स्टार्टअप (HoverIt) ने विकसित किया है, जिसके संस्थापक पवन पांडे (24 वर्ष) हैं। यह स्टार्टअप उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत काम कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस ड्रोन की चर्चा काफी जोर- शोर से चल रही है। इसकी तुलना ईरान के शक्तिशाली और नई तकनिकी वाले ड्रोन्स से की जा रही है। यह एक लोइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) है, जिसे आम भाषा में ‘सुसाइड ड्रोन’ या ‘कामिकाजे ड्रोन’ भी कहा जाता है।
क्या है ‘दिव्यास्त्र’ की खासियत?
यह स्वदेशी ड्रोन कई आधुनिक विशेषताओं से लैस है और दावा किया जा रहा है कि यह ड्रोन निगरानी के साथ- साथ दुश्मनों के ठिकानो को सटीक निशाना लगाकर उनको तबाह करने में भी सक्षम है। इसकी मारक क्षमता लगभग दो हजार किलोमीटर तक है और हमले के समय इसकी गति 300 से 400 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है। यह अपने साथ 50 से 100 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में भी सक्षम है। इसकी रेंज और मारक क्षमता को देखते हुए विशेषज्ञ इसे ईरान के मशहूर ताकतवर ड्रोन्स ‘शाहिद’ सीरीज से तुलना कर रहे हैं। इस ड्रोन को बेहद कम लागत में तैयार किया गया है। यह भारतीय रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को नई उड़ान दे सकता है। इस ड्रोन के परीक्षण का एक वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में ड्रोन को सफलतापूर्वक उड़ान भरते और मुश्किल बाधाओं को पार करते हुए देखा जा सकता है। आनंद महिंद्रा जैसे उद्योगपतियों और कई तकनीकी विशेषज्ञों ने भी इस नवाचार (Innovation) की काफी सराहना की है। इस उपलब्धि पर उत्तर प्रदेश के इन लड़कों को देशभर से बधाइयां मिल रही हैं।
इस ‘दिव्यास्त्र’ ड्रोन की क्षमता को देखते हुए कुछ रक्षा स्टार्टअप्स और सुरक्षा एजेंसियों ने इन युवाओं से संपर्क साधा है और कहा है कि यदि इसे आधिकारिक तौर पर सेना या अर्धसैनिक बलों में शामिल किया जाता है, तो यह सीमा पर निगरानी और ऑपरेशन्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
रिपोर्ट- सुशील कुमार साह