उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया एप फेसबुक पर स्माल बैंक के एप पर क्लिक करते ही बुजुर्ग के खाते से करीब 9.80 लाख रुपये निकल गए। साइबर अपराधियों ने सबसे पहले उनके बैंक में जमा फिक्सड डिपोजिट को तुड़वाकर उस धनराशि को बुजुर्ग के खाते मे जमा कराया। फिर सारी रकम को अपने खातों में जमा करवा दी। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में सोशल मीडिया एप फेसबुक पर स्माल बैंक के एप पर क्लिक करते ही बुजुर्ग के खाते से करीब 9.80 लाख रुपये निकल गए। साइबर अपराधियों ने सबसे पहले उनके बैंक में जमा फिक्सड डिपोजिट को तुड़वाकर उस धनराशि को बुजुर्ग के खाते मे जमा कराया। फिर सारी रकम को अपने खातों में जमा करवा दी। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सदर के शहजादी मंडी अनूप कुमार अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि बीते 16 अक्टूबर को उन्होंने फेसबुक पर उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक का विज्ञापन देखा और उसे क्लिक कर दिया। उन्होंने देखा कि वह पेंशनर कार्ड का लिंक था। इसके बाद कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर कॉल आई।
साइबर शातिरों ने एफडी को तुड़वाकर खाते से निकाली रकम
बता दें कि उसके बाद कॉल करने वाले ने उनके पेंशनर कार्ड के बारे में पूछा। इसके बाद उसने समझाया कि जैसा बताया जा रहा है वैसा ही करते जाएंं। साथ ही कॉल करने वाले ने उनसे वाट्सएप पर चैट करके नेटबैकिंग आन करवा ली। बता दें कि उस वक्त उनके खाते में 12 हजार रुपये और दस लाख रुपये की एफडी थी। फिर नेट बैंकिंग से उनकी एफडी को तुड़वाने के बाद पैसे उनके खाते में जमा करवा दी। फिर दोपहर में उनके मोबाइल पर 3.39 लाख रुपये कटने का मैसेज आया। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से उनके खाते से कई बार कुल करीब 9.80 लाख रुपये निकल गए। जब वे बैंक जाकर इसके बारे में बताया तो, पता चला कि वह साइबर अपराध के शिकार हो गए हैं।
मुकदमा दर्ज किया गया है, आरोपितों का पता लगाने का प्रयास
साइबर क्राइम डीसीपी आदित्य ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही जिन खातों में रकम भेजी गई है, उनके आधार पर आरोपितों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
नोट: यदि ऑनलाइन ठगी हो जाए तो पीड़ित को तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर भी रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए। शिकायत में देरी होने पर ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है।