योगी सरकार (Yogi Government) के चार सीनियर आईएएस अफसरों पर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow Bench) ने अवमानना के आरोप तय किए हैं। बता दें कि यह मामला करीब चार साल पुराने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे 19 जुलाई 2022 के आदेश का आंशिक रूप से भी पालन साबित हो सके।
लखनऊ । योगी सरकार (Yogi Government) के चार सीनियर आईएएस अफसरों पर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow Bench) ने अवमानना के आरोप तय किए हैं। बता दें कि यह मामला करीब चार साल पुराने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे 19 जुलाई 2022 के आदेश का आंशिक रूप से भी पालन साबित हो सके।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने 2022 में सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में फैसले के अनुपालन से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। बता दें कि जिन अधिकारियों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग और प्रमुख सचिव ग्रामीण अभियंत्रण सौरभ बाबू शामिल हैं। इसके बावजूद सोमवार की सुनवाई में अनुपालन का कोई ठोस रिकॉर्ड सामने नहीं आने पर अदालत ने व्यक्तिगत रूप से मौजूद चारों अधिकारियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए।
क्या था 2022 का आदेश?
सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में हाई कोर्ट ने 19 जुलाई 2022 को आदेश दिया था कि संबंधित कर्मचारियों को लागू शासनादेशों के तहत लाभ दिया जाए। इसमें वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान आदेश जारी करना शामिल था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि चार महीने के भीतर संबंधित लाभ नहीं दिए जाते हैं तो बकाया राशि पर सात प्रतिशत साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा। याचिकाओं में आरोप है कि आदेश के करीब चार साल बीत जाने के बाद भी इसका पालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में सहमति दिखाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट का मूल आदेश विशेष अपील में भी बरकरार रहा। इसके बाद 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश की पुष्टि कर दी। राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद आदेश के अनुपालन का ठोस दस्तावेज कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका।
हाई कोर्ट ने सभी आरोपित अधिकारियों को 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया
लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय चौहान के खिलाफ अवमानना के आरोप अगली सुनवाई में तय किए जाएंगे। अदालत ने सभी आरोपित अधिकारियों को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने और 13 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।