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Cyclone Murasu : अब चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का खौफ! तीन नवंबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा, इन राज्यों में भारी बारिश

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 नवंबर रविवार को दोपहर 11:30 बजे पुष्टि की कि दक्षिण-पश्चिम और आसपास के पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में स्थित गहरा डिप्रेशन चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclone Murasu) में बदल गया है। इस तूफान का नाम ‘मुरासु’ रखा गया है। यह तूफान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। आगे चलकर गंभीर चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) बनने की संभावना है। अनुमान है कि यह 2 नवंबर की मध्य रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश तट को पार करेगा। उस समय हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों में 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस वजह से दो और तीन नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, एक और दो नवंबर को तमिलनाडु, तीन और चार नवंबर को छत्तीसगढ़ और दक्षिणी ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश होने जा रही है। इसके अलावा, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तीन नवंबर को तेलंगाना में बहुत भारी बरसात होगी।

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उत्तर हिंद महासागर (North Indian Ocean) में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) की समिति द्वारा तैयार सूची से दिए जाते हैं। इस सूची में 13 देशों के सुझाए गए नाम शामिल होते हैं। ‘मुरासु’ नाम भारत द्वारा सुझाया गया है।

तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ है प्राचीन ढोल या ड्रम। पुराने समय में इस वाद्य यंत्र का इस्तेमाल गांवों में जानकारी फैलाने और प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी देने के लिए किया जाता था। इसलिए यह नाम चुना गया। यह नाम IMD द्वारा आधिकारिक रूप से तब दिया जाता है जब सिस्टम चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंच जाता है।

अभी कहां हैं तूफान और आगे का रास्ता?

1 नवंबर दोपहर में यह तूफान चेन्नई से लगभग 560 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, विशाखापट्टनम से 660 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और नेल्लोर से 630 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था। यह लगातार मजबूत हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह 2 नवंबर की सुबह तक गंभीर चक्रवाती तूफान बन सकता है। इसके बाद यह आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ेगा। हाल ही में चक्रवात अर्नब के असर से उबर रहे इलाकों के लिए यह दूसरा झटका हो सकता है।

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और रायलसीमा में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश भी हो सकती है। उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी मध्यम बारिश हो सकती है। तेज हवाओं से पेड़ गिरने, बिजली के तार टूटने और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने बचाव तैयारियां शुरू कर दी हैं।

तैयारी और सावधानी क्यों जरूरी है?

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पिछले कुछ दिनों में एक चक्रवात के बाद दूसरा सिस्टम आना क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण है। लोग अभी पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लौटे हैं। इसलिए समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना, जरूरी सामान तैयार रखना और आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। IMD लगातार अपडेट जारी कर रहा है। कुल मिलाकर मुरासु एक मध्यम तीव्रता का चक्रवात साबित हो सकता है, लेकिन भारी बारिश और तेज हवाओं से नुकसान की आशंका बनी हुई है। सतर्कता बरतकर प्रभाव को कम किया जा सकता है।

वहीं, दक्षिण भारत की बात करें तो एक से सात नवंबर के दौरान केरल, माहे, पांच से सात नवंबर के दौरान लक्षद्वीप में, दो से पांच नवंबर के दौरान तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तीन से पांच नवंबर के दौरान उत्तर आंतरिक कर्नाटक, दो से चार नवंबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, दो से तीन नवंबर के दौरान रायलसीमा में, तीन से चार नवंबर के दौरान तेलंगाना में काफी भारी बरसात होगी। एक से सात नवंबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, एक से चार नवंबर के दौरान लक्षद्वीप, एक नवंबर को और छह व सात नवंबर के दौरान तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, एक से दो नवंबर और छह व सात नवंबर के दौरान उत्तर आंतरिक कर्नाटक, एक नवंबर को और पांच से सात नवंबर के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, एक नवंबर को और चार से सात नवंबर के दौरान रायलसीमा, एक से दो नवंबर और पांच से सात नवंबर के दौरान तेलंगाना में बारिश होगी।

वहीं, मध्य भारत में भी जोरदार बारिश का अलर्ट है। तीन से पांच नवंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश, एक से पांच नवंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश, दो से पांच नवंबर के दौरान विदर्भ, एक और दो नवंबर और पांच से सात नवंबर के दौरान छत्तीसगढ़ में कहीं कहीं से लेकर कुछ जगहों पर बारिश होगी। तीन से चार नवंबर के दौरान छत्तीसगढ़ में काफी बड़े हिस्से से लेकर व्यापक रूप से बरसात होगी। तीन और चार नवंबर के दौरान छत्तीसगढ़ में कहीं कहीं आंधी तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं जोकि 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है के चलने की संभावना है। इसके अलावा, तीन से पांच नवंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में, एक नवंबर और तीन से पांच नवंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश, तीन और चार नवंबर के दौरान विदर्भ में तेज हवाएं चलेंगी। दो नवंबर को छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं आंधी तूफान आने और बिजली गिरने की संभावना है।

झारखंड, बंगाल, बिहार, ओडिशा में भारी बारिश

पूर्वी भारत में चक्रवाती तूफान की वजह से कई राज्यों में मूसलाधार बारिश होगी। एक से सात नवंबर के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, एक से चार नवंबर के दौरान झारखंड और उप हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, एक से तीन नवंबर के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, एक और दो नवंबर के दौरान बिहार में, एक नवंबर और पांच से सात नवंबर के दौरान ओडिशा में कहीं कहीं से लेकर छिटपुट बारिश होगी। दो से चार नवंबर के दौरान ओडिशा में काफी बरसात होने वाली है। दो नवंबर को ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, तीन और चार नवंबर के दौरान दक्षिण ओडिशा में बहुत भारी बारिश होगी।

उत्तर भारत में भी बरसात का अलर्ट जारी किया गया है। एक और दो नवंबर व पांच नवंबर को जम्मू कश्मीर, लद्दाख में कहीं कहीं से लेकर छिटपुट बारिश होने की संभावना है। एक और दो नवंबर के दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश होगी। एक और दो नवंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश होगी। एक और दो नवंबर को उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर हल्का से मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है।

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