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स्पेस की दुनिया में नए शिखर पर भारत, NASA ने ‘मून बेस मिशन’ में पार्टनर बनने के लिए ISRO को दिया न्योता

By Sushil Sah 
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The World of Space: भारत के अंतरिक्ष इतिहास के लिए यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जहां अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने महत्वाकांक्षी ‘मून बेस’ प्रोग्राम में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण दिया है। इस आदरपूर्ण निमंत्रण को पूरी दुनिया में भारत की बढ़ती अंतरिक्ष ताकत और ‘Chandrayaan-3’ की ऐतिहासिक सफलता के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

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आपको बता दें कि यह अहम घोषणा 5 और 6 अगस्त, 2026 को बेंगलुरु में ISRO मुख्यालय में आयोजित 9वीं भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की बैठक के दौरान की गई।

मिशन से जुड़ी मुख्य बातें और भारत को फायदा

इस समझौते के तहत दोनों देश चंद्रमा से जुड़े ओपन साइंटिफिक डेटा को आपस में साझा करने के लिए सहमत हुए हैं। इसके अलावा यह साझेदारी Artemis Accords, जिस पर भारत ने 2023 में हस्ताक्षर किए थे, के ढांचे के तहत आगे बढ़ेगी। इसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों के रहने के लिए पहली स्थायी चौकी बनाना है। साथ ही चंद्रमा पर बनने वाला यह मून बेस भविष्य में मंगल जैसे गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक लॉन्च पैड और बेस कैंप के रूप में काम करेगा।

इस महत्वपूर्ण कदम से भारत को अपने ‘स्पेस विजन 2047’ जिसमें 2040 तक भारतीय को चांद पर उतारना शामिल है और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीकों को तेजी से विकसित करने में सहायता मिलेगी। आपको बता दें कि यह साझेदारी केवल उपग्रह मिशनों तक सीमित न रहकर अब चंद्रमा की सतह पर इंसानी बस्तियां बसाने और गहरे अंतरिक्ष की खोज में भारत और अमेरिका के एक नए युग की शुरुआत कर रही है।

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अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में उभरा भारत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निमंत्रण साबित करता है कि भारत अब अंतरिक्ष विज्ञान में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक प्रमुख नीति-निर्माता और लीडर बन चुका है। अब दोनों देश मिलकर न सिर्फ चांद की सतह पर खोज करेंगे, बल्कि ब्रह्मांड के रहस्यों को आसानी से जानने और सुलझाने में एक नए युग की शुरुआत करेंगे।

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