क्या होता है Food Divorce?
मान लीजिए एक पार्टनर वजन कम करने के लिए सलाद, दाल, सब्जियां या हाई-प्रोटीन डाइट लेना चाहता है, जबकि दूसरा पार्टनर पिज्जा, बर्गर, बिरयानी या अपनी पसंद का कोई दूसरा खाना खाना चाहता है। ऐसे में हर दिन यह तय करना कि आज क्या बनाया जाए और किसकी पसंद चलेगी, कई बार बहस की वजह बन जाता है।
ऐसी स्थिति में कुछ कपल्स ने एक आसान तरीका अपनाना शुरू किया है, एक ही घर में रहते हुए भी अपनी-अपनी पसंद का खाना खाना। यानी एक पार्टनर अपनी डाइट के हिसाब से खाना खा सकता है और दूसरा अपनी पसंद का। इससे खाने को लेकर बार-बार होने वाली बहस और समझौते की स्थिति कम हो सकती है।
Food Divorce का अर्थ यह नहीं है कि कपल हमेशा अलग-अलग बैठकर खाना खाएं। दोनों चाहें तो एक साथ डिनर कर सकते हैं, वीकेंड पर बाहर खाना खा सकते हैं या किसी खास मौके पर एक ही डिश शेयर कर सकते हैं। असल में इस ट्रेंड का मकसद खाने को लेकर दबाव कम करना और एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करना है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
आजकल लोगों की डाइट और लाइफस्टाइल पहले से काफी अलग हो गई है। कोई फिटनेस पर ध्यान दे रहा है, कोई वजन घटा रहा है, कोई वेजिटेरियन है तो कोई नॉन-वेज खाना पसंद करता है। ऐसे में एक ही तरह का खाना दोनों की जरूरतों को पूरा करे, यह जरूरी नहीं।
यही वजह है कि कुछ कपल्स खाने के मामले में अपनी-अपनी पसंद को प्राथमिकता देना बेहतर समझ रहे हैं। रिश्तों में हर चीज साथ करना जरूरी नहीं होता। कई बार एक-दूसरे को अपनी पसंद और स्पेस देना ही रिश्ते को बेहतर बना सकता है। इसलिए Food Divorce को रिश्ते में दूरी के तौर पर देखने के बजाय, इसे कपल्स के बीच कम टकराव और ज्यादा व्यक्तिगत आजादी के एक नए तरीके के रूप में भी देखा जा रहा है।