Longest Day on Earth : ब्रह्मांड के रहस्य निराले है।पृथ्वी के वातावरणीय प्रभाव इन रहस्यों को जानने की जिज्ञासा पैदा करते है। सूर्य की गति और रोशनी और ताप को लेकर किए गए वैज्ञानिक अध्ययन कई अनसुलझे रहस्यों को सुलझानें में सफल रहे और दुनिया के समने प्रस्तुत किए। इन्हीं रहस्यों में एक रहस्य यह भी है साल का सबसे बड़ा दिन और साल की सबसे बड़ी रात कब है और इसका कारण क्या है? आइये जानते है।
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साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून और कभी-कभी 22 जून को होता है। इस साल 2026 में सबसे बड़ा दिन 21 जून रविवार को है। खगोलीय गणना के अनुसार, इस दिन भारत में दिन की अवधि लगभग 13 घंटे 58 मिनट की होगी।
ग्रीष्म संक्रांति
इस दिन के बाद सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे। इसे विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है। इस घटना के पीछे अहम खगोलीय (Astronomical) और वैज्ञानिक वजहें हैं। साथ ही ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में भी इसे बेहद खास माना गया है।
पृथ्वी पर मौसम बदलता है
खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, लेकिन वह अपनी धुरी (Axis) पर बिल्कुल सीधी खड़ी नहीं है। वह साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है। इस झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के वजह से ही पृथ्वी पर मौसम बदलता है और दिन-रात छोटे-बड़े होते जाते हैं।
कर्क रेखा
बता दें कि 21 जून के दिन सूरज उत्तरी गोलार्ध में ट्रॉपिक ऑफ कैंसर (Tropic of Cancer) के ऊपर मौजूद रहता है। गुजरात से शुरू होकर मध्य प्रदेश के रास्ते मिजोरम तक जाने वाली ये कर्क रेखा देश को दो बराबर हिस्सों में विभाजित करती है। जिसका मतलब है कि आज के दिन सूर्य देश के बीचो-बीच मौजूद है। यही वजह है कि पृथ्वी पर मिलने वाली सूर्य ऊर्जा आज 30 प्रतिशत बढ़ जाती है।
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उत्तरी गोलार्द्ध
इस दिन सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर सीधे 90 डिग्री के एंगल से पड़ती हैं। इस कारण उत्तरी गोलार्द्ध को इस दिन सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा समय के लिए मिलती है। उत्तरी गोलार्द्ध में भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश आते हैं।इस दिन रात की अवधि लगभग 10 से 11 घंटे होती है, यानी साल की सबसे छोटी रात।
21 जून जीरो शैडो डे
दोपहर के समय जब सूर्य ठीक आपके सिर के ऊपर (Zenith) होता है तो कुछ पलों के लिए आपकी परछाई भी लगभग गायब या न्यूनतम हो जाती है, इसे जीरो शैडो डे (Zero Shadow Day) भी कहते हैं।
ब्रह्मांडीय ऊर्जा
ज्योतिष और योग शास्त्र में इस दिन को ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) का चरम बिंदु माना जाता है।