नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक नाम लगातार सुर्खियों में है-मेजर जनरल मोहसीन रेजाई (Major General Mohsen Rezaei)। ईरान के इस वरिष्ठ सैन्य रणनीतिकार ने अमेरिका को ऐसी चेतावनी दी है, जिसने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। रेजाई ने अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली संयंत्रों या दूसरी अहम सुविधाओं को निशाना बनाया गया तो ईरान का जवाब पहले जैसा नहीं होगा।
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उन्होंने कहा कि इस बार, आंख के बदले आंख नहीं सिर के बदले सिर काटा जाएगा । यानी रेजाई का सीधा संदेश था कि अगर अमेरिका ईरान की अहम सुविधाओं पर हमला करता है, तो ईरान उससे कहीं ज्यादा कड़ा जवाब देगा। लेकिन उनकी धमकी यहीं खत्म नहीं हुई। मोहसीन रेजाई ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना और उसके जहाजों को फारस की खाड़ी में गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
रेजाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) को यह संदेश भी दिया कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ संघर्ष को रोकने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है। उन्होंने इसे अमेरिका को बचाने की “आखिरी समय-सीमा” के तौर पर पेश किया।
आखिर ईरान चाहता क्या है?
जानकारी के मुताबिक, युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया नहीं जाता और अमेरिका यह अंतरराष्ट्रीय गारंटी नहीं देता कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। यानी ईरान की मांग सिर्फ सैन्य कार्रवाई रोकने तक सीमित नहीं है। वह आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, नुकसान का मुआवजा और अमेरिकी हस्तक्षेप से सुरक्षा की गारंटी भी चाहता है और अब इसी सख्त रुख के बीच मोहसीन रेजाई (Mohsen Rezaei) को ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनई (Iran’s Supreme Leader Mojtaba Khamenei) का सैन्य सलाहकार और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (Military Advisor and Supreme National Security Council) में प्रतिनिधि जैसी अहम भूमिका दी गई है।
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रेजाई कोई नए सैन्य चेहरा नहीं हैं। मोहसीन रेजाई (Mohsen Rezaei) ईरान के सबसे अनुभवी सैन्य नेताओं में गिने जाते हैं। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महज 27 साल की उम्र में वह IRGC के कमांडर बने और करीब 16 वर्षों तक इस ताकतवर सैन्य संगठन का नेतृत्व किया। ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी उन्होंने लंबे समय तक सैन्य कमान संभाली। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा। यानी सैन्य अनुभव के साथ-साथ उन्हें ईरान की राजनीति और आर्थिक नीतियों की भी अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है।
अब देखना होगा कि क्या रेजाई की ये चेतावनियां सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति हैं या ईरान वास्तव में अमेरिका के खिलाफ और बड़ा सैन्य कदम उठाने की तैयारी में है। फिलहाल इतना साफ है कि ईरान का रुख बेहद सख्त है और मोहसीन रेजाई (Mohsen Rezaei) का यह बयान इस टकराव को और ज्यादा गंभीर बना सकता है।
रिपोर्ट : कल्पना पांडेय