UP Panchayat Elections : यूपी में पंचायत चुनावों को लेकर लग रही अटकलों के बीच, ग्राम प्रधानों के बतौर प्रशासक कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी चल रही है। खबर है कि ग्राम प्रधानों का बतौर प्रशासक पद पर छह महीने का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, लेकिन पंचायतीराज विभाग फिर से कार्यकाल बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
पढ़ें :- UP Panchayat Chunav Update : तीन महीने में पंचायत चुनाव होना बेहद मुश्किल, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट बनी बड़ी वजह!
दरअसल, प्रदेश की योगी सरकार ने छह महीने या त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने तक 57694 ग्राम प्रधानों को 26 मई को प्रशासक के पद पर नियुक्त किया गया था। लेकिन, अब उनके कार्यकाल को फिर बढ़ाने की तैयार चल रही है। जिससे उन अटकलों को बल मिल रहा है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद तीन महीने में पंचायत चुनाव संपन्न कराना संभव नहीं हो पाएगा। पिछले दिनों सामने आयी एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि ओबीसी आरक्षण तय करने वाले पिछड़ा वर्ग आयोग को 20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपनी थी। 75 में से 50 जिलों का सर्वे पूरा हो चुका है जबकि, 25 जिलों का भ्रमण बाकी है। ऐसे में आयोग 3 महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए हर जिले की स्थिति को समझना जरूरी है। इसके लिए आयोग को जिलों में जाकर लोगों की बात सुननी है और जुटाए गए आंकड़ों का मिलान करना है। आयोग के लिए सभी जिलों से मिले आंकड़ों की सही तरीके से जांच करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दावा यह भी किया जा रहा है कि 31 दिसंबर से पहले रिपोर्ट आने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट में देरी से तय समय में ग्राम पंचायत चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 14 जनवरी से पहले कराने होंगे, जोकि मौजूदा परिस्थितियों में मुमकिन नहीं लग रहा है। माना जा रहा है कि योगी सरकार इस मुद्दे पर या तो हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है। सूत्रों की मानें तो इस बारे में अतिरिक्त महाधिवक्ता से हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर विधिक परामर्श मांगा है और न्याय विभाग से भी परामर्श लिया जाएगा। जिसके बाद शासन अगला कदम उठाएगा।