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सम्राट चौधरी होंगे बिहार के नए सीएम, बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद राज्यपाल से करेंगे मुलाकात, शपथ ग्रहण कल 11 बजे

By संतोष सिंह 
Updated Date

पटना। बीजेपी विधायक दल का सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) को मंगलवार को नया नेता चुना गया है। वह बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Bihar New CM Samrat Chaudhary) होंगे। थोड़ी देर में राज्यपाल से मिलकर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। कल 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथग्रहण समारोह होगा। बिहार में लंबे समय बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होगी।  स्पष्ट है कि इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच बिहार की बदलती सियासी तस्वीर में सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) एक बेहद अहम चेहरा बनकर उभरे हैं।

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विरासत और शुरुआती संघर्ष

सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में स्थापित कर दिया।

इसके बाद सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) ने भाजपा का रास्ता चुना। राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया। उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई। 2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इस बात का संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है। फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया। इसके बाद दुबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

मुरैठा की प्रतिज्ञा

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बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में वह नीतीश कुमार के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे। हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही डिप्टी सीएम की भूमिका निभाते रहे हैं। सम्राट चौधीरी ने जब नीतीश कुमार को हटाने का संकल्प लिया था और मुरेठा नहीं उतारने का वचन लिया था तो वह काफी चर्चा में रहे थे।

मौजूदा दौर की राजनीति में क्यों हैं खास?

बता दें कि सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के ‘कुश’ समुदाय से आते हैं। भाजपा उनके जरिए बिहार के एक बड़े पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। वे विपक्ष और सहयोगियों, दोनों के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं।

सत्ता में दोहरा कार्यकाल

यहां यह भी बता दें कि पहली बार जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर 2025 को दोबारा डिप्टी सीएम बने थे। भाजपा की राजनीति की दृष्टि से देखिये तो यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर और बिहार सरकार में उनका कद लगातार बढ़ता रहा है। आज जब बिहार की ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव की चर्चा है, सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जानकार कहते हैं कि सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) न केवल सरकार का हिस्सा हैं, बल्कि संगठन और सत्ता के बीच एक मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं। आगामी चुनावों में बिहार भाजपा का भविष्य काफी हद तक सम्राट चौधरी के नेतृत्व और उनकी रणनीति पर टिका होगा।

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