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राज्य सरकारों की मुफ्त स्कीमों पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, बोला- इनका खर्च और कौन उठाएगा? खैरात नहीं रोजगार दो…

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को फ्रीबीज बांट रहे राज्यों को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर करदाता के अलावा इन योजनाओं का खर्च और कौन उठाएगा? उन्होंने कहा कि भोजन और बिजली के बाद अब सीधा कैश ट्रांसफर होने लगा है। साथ ही अदालत ने कहा है कि सरकार को रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है।

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राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां या ‘डोल्स’ बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए

गुरुवार को सीजेआई (CJI)  ने कर्ज के बाद भी राज्यों की तरफ से मुफ्त में चीजें बांटने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने सवाल किया कि आखिर करदाता नहीं, तो इन योजनाओं के लिए भुगतान कौन करेगा? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नकद बांटने और मुफ्त की सुविधाएं देने को लेकर वित्तीय समझदारी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने का कोर्ट का कहना है कि राज्यों को मुफ्त की रेवड़ियां या ‘डोल्स’ बांटने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। सीजेआई (CJI)   ने चेताया है कि विकास पर अब कम खर्च किया जा रहा है।

मुफ्त खाना, मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली देने लगेंगे और अब तो सीधा कैश हो रहा है ट्रांसफर 

उन्होंने कहा कि अगर आप मुफ्त खाना, मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली देने लगेंगे और अब तो सीधा कैश ट्रांसफर हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बेंच ने कहा है कि कई राज्य राजस्व घाटे का सामना कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किए हुए हैं। कोर्ट का मानना है कि कर्मचारियों के वेतन और ‘मुफ्त की सुविधाओं’ का बोझ इतना बढ़ गया है कि वे विकास के लिए जरूरी फंड को खत्म कर रहे हैं।

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि एक साल में जुटाए गए राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा, इसे विकास में क्यों नहीं लगाया जा सकता? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम भारत सरकार केस (Tamil Nadu Electricity Distribution Corporation vs. Government of India case) की सुनवाई कर रहा था। अदालत ने निगम को उपभोक्ता की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को मुफ्त बिजली (Free Electricity) देने का वादा करने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने मुफ्त की सेवा के कल्चर की कड़ी आलोचना की। साथ ही कहा कि यह आर्थिक विकास में बाधा डालती है।

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