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CAA कानून में किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है : गृहमंत्री अमित शाह

Amit Shah's Statement on CAA Law and NRC : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 यानी सीएए के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही सीएए कानून देशभर में लागू हो गया है। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले सीएए कानून लागू किए जाने को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ। इस मद्दे पर विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, सीएए कानून को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान सामने आए हैं। अमित शाह ने कहा कि CAA कानून में NRC का कोई प्रावधान नहीं है। इस कानून में किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है।

By Abhimanyu 
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Amit Shah’s Statement on CAA Law and NRC : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 यानी सीएए के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही सीएए कानून देशभर में लागू हो गया है। हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले सीएए कानून लागू किए जाने को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ। इस मद्दे पर विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। वहीं, सीएए कानून को लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान सामने आए हैं। अमित शाह ने कहा कि CAA कानून में NRC का कोई प्रावधान नहीं है। इस कानून में किसी की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है।

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केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक न्यूज एजेंसी के पॉडकास्ट में कहा, ‘भाजपा ने 2019 में अपने घोषणा पत्र में कहा था कि हम CAA लाएंगे और पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के शरणार्थियों को नागरिकता देंगे। भाजपा का एजेंडा बहुत स्पष्ट है और उसी एजेंडे के आधार पर हमें बहुमत मिला। 2019 में ही ये बिल संसद के दोनों सदनों ने पास कर दिया, उसके बाद कोविड के कारण ये थोड़ा लेट हुआ।’ उन्होंने कहा, ‘विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति कर वोट बैंक को मजबूत करना चाहते हैं। वे बेनकाब हो चुके हैं और देश की जनता जानती है कि CAA इस देश का कानून है। मैं 4 साल में कम से कम 41 बार बोल चुका हूं कि CAA लागू होगा और चुनाव से पहले होगा।’

अमित शाह ने आगे कहा, ‘CAA से इस देश के अल्पसंख्यकों या किसी और व्यक्ति को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि CAA में किसी की नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है। CAA सिर्फ और सिर्फ तीन देश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी शरणार्थियों को नागरिकता देने का कानून है।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘मुसलमानों को भी नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार है, किसी के लिए रास्ता बंद नहीं है। यह विशेष अधिनियम इसलिए बनाया गया है क्योंकि ये बिना किसी दस्तावेज़ के आए हैं।’

NRC का CAA से कोई लेना-देना नहीं : अमित शाह

अमित शाह ने कहा, ‘जो दुष्प्रचार चल रहा है, उसके कारण कई लोग आवेदन करने में भी संकोच करेंगे। मैं सभी लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार पर भरोसा रखिए आपको पूरे प्रभाव से नागरिकता दी जाएगी। यह कानून आपको शरणार्थी के रूप में स्वीकार कर रहा है। यदि आपने अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया है, तो आपके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं होगा, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। सभी को समान अधिकार दिए जाएंगे क्योंकि वे भारत के नागरिक बन जाएंगे।’

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शाह ने आगे कहा, ‘NRC का CAA से कोई लेना-देना नहीं है। असम ही नहीं बल्कि देश के हर हिस्से में CAA लागू होगा, सिर्फ नॉर्थ ईस्ट के राज्य जहां दो प्रकार के विशेष अधिकार दिए गए हैं, उन्हीं में CAA लागू नहीं होगा। इसमें वे क्षेत्र शामिल हैं जहां इनर लाइन परमिट (ILP) का प्रावधान है और जिन्हें संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा दिया गया है।’

जिनके पास दस्तावेज नहीं है उनके लिए हम कोई रास्ता ढूढेंगे : शाह 

केन्द्रीय गृहमंत्री ने यह भी कहा, ‘जिनके पास दस्तावेज नहीं है उनके लिए हम कोई रास्ता ढूढेंगे लेकिन जिनके पास दस्तावेज है वे लगभग 85% से ज्यादा है। कोई समय सीमा नहीं है, आराम से समय लेकर आवेदन किया जा सकता है, भारत सरकार आपके उपलब्ध समय के अनुसार साक्षात्कार के लिए आपको कॉल करेगी। सरकार आपको दस्तावेज़ के ऑडिट के लिए बुलाएगी और आमने-सामने साक्षात्कार किया जाएगा। वे सभी लोग जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 2014 के बीच भारत में प्रवेश किया है उनका यहां स्वागत है।’

केजरीवाल और ममता पर साधा निशाना

इस दौरान शाह ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने भ्रष्टाचार के उजागर होने से आपा खो बैठे हैं। उन्हें पता नहीं है कि ये लोग भारत में आ चुके हैं और भारत में रह रहे हैं। अगर उन्हें इतनी ही चिंता है तो वे बांग्लादेशी घुसपैठियों की बात क्यों नहीं करते या रोहिंग्या का विरोध क्यों नहीं करते? दिल्ली का चुनाव उनके लिए लोहे के चबाने जैसा है, इसलिए वोवोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। वे विभाजन की पृष्ठभूमि भूल गए हैं, इसलिए उन्हें शरणार्थी परिवारों से मिलकर चाय पीनी चाहिए।’

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उन्होंने आगे कहा, ‘मैं ममता बनर्जी से करबद्ध निवेदन करना चाहता हूं कि राजनीति करने के हजारों मंच हैं, प्लीज बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदू का अहित न करें, आप भी एक बंगाली हैं। ममता जी को मैं खुली चुनौती देता हूं कि इस कानून की धारा में से एक धारा वे नागरिकता छीनने वाली बता दें, वे खौफ पैदा कर रही हैं, हिन्दू और मुसलामानों के बीच विवाद कराना चाहती हैं। ममता जी इसको मत रोकिये, आप घुसपैठ रोकिये। असम में भाजपा सरकार आने के बाद घुसपैठ पूरी तरह से बंद हो गई है।’

 

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