लखनऊ: विजयादशमी के मौके पर यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय से दक्षिण भारत की तर्ज पर तैयार PDA यात्रा रथों को नारियल फोड़कर और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बड़ा अखिलेश ने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर भाजपा पर जबरदस्त हमला बोला और सत्ताधारी पार्टी पर समाज को बंटाने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि राम राज्य और समाजवाद एक ही हैं और दोनों पर भरोसा रखने वाले सच्चे सनातनी हैं, जबकि बुराई फैलाने वाले नकली सनातनी हैं।
लखनऊ: विजयादशमी के मौके पर यूपी के पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय से दक्षिण भारत की तर्ज पर तैयार PDA यात्रा रथों को नारियल फोड़कर और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बड़ा अखिलेश ने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर भाजपा पर जबरदस्त हमला बोला और सत्ताधारी पार्टी पर समाज को बंटाने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि राम राज्य और समाजवाद एक ही हैं और दोनों पर भरोसा रखने वाले सच्चे सनातनी हैं, जबकि बुराई फैलाने वाले नकली सनातनी हैं।
लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “भारत में, यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि हमें हमेशा बुराई के खिलाफ लड़ते रहना चाहिए। आइए आज हम संकल्प लें कि इस धरती से बुराई को हमेशा के लिए मिटा देंगे, और इसकी शुरुआत यहीं उत्तर प्रदेश से करेंगे। भगवान श्री राम ने हमें ‘राम राज्य’ का रास्ता दिखाया था। हमने अक्सर कहा है कि समाजवाद ही असल में ‘राम राज्य’ है, और ‘राम राज्य’ ही समाजवाद है। जो इन दोनों में विश्वास रखते हैं, वे ही सच्चे ‘सनातनी’ हैं… एक सच्चा ‘सनातनी’ दुनिया में अच्छाई लाता है, जबकि जो लोग बुराई फैलाते हैं, वे केवल ‘नकली’ सनातनी हैं। इसलिए, हम सभी को सतर्क रहना चाहिए।”
भाजपा पर एआई के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “आज सुबह, बीजेपी ने मेरा एक वीडियो जारी किया जिसमें मुझे रावण के रूप में दिखाया गया है… AI का इस्तेमाल भलाई के लिए होना चाहिए, लेकिन बीजेपी इसका इस्तेमाल बुराई फैलाने के लिए कर रही है।” इस दौरान पूर्व सीएम ने दावा किया कि सपा कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक समूहों के लगातार विरोध-प्रदर्शनों के कारण चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया में हुई गलतियों को स्वीकार करना पड़ा। उनका आरोप है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर 14 वोट दर्ज किए गए हैं। सत्ताधारी दल और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत है।