नई दिल्ली। UPI पेमेंट को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। संसद में रखे गए एक प्रस्ताव के बाद इस बात की चर्चा शुरू हुई है कि भविष्य में UPI के जरिए होने वाले कुछ लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाया जा सकता है। इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत कई कारोबारी संगठन विरोध जता चुके हैं। अब भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने भी सरकार को इस फैसले पर दोबारा सोचने की सलाह दी है।
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अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर MDR को लेकर चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि UPI भारत की उन डिजिटल उपलब्धियों में से है, जो बिना किसी बड़ी परेशानी के घड़ी की तरह सुचारू रूप से बड़े स्तर पर काम कर रही है। ऐसे में इस पर किसी तरह का चार्ज लगाना डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने इसे ‘पिछड़ा कदम’ बताते हुए सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा।
दरअसल लोकसभा ने टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी है। इसके जरिए पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम से जुड़े कानून में बदलाव किया गया है। हालांकि इस कानून के बाद अभी UPI पर कोई MDR लागू नहीं हुआ है। इसका मकसद ऐसा कानूनी प्रावधान तैयार करना है जिसके तहत सरकार आगे चलकर अधिसूचना के जरिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था में बदलाव कर सके। यानी फिलहाल UPI पेमेंट पर कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है लेकिन भविष्य में MDR लागू करने का रास्ता कानून के जरिए खुल सकता है। इसी संभावना को लेकर राजनीतिक दलों, कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हुई है।
वित्त मंत्री ने साफ किया- ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR
UPI को लेकर चल रही चर्चाओं और सोशल मीडिया पर सामने आ रही अलग-अलग खबरों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि अभी MDR लागू नहीं किया गया है और सरकार ने इसे लागू करने का कोई फैसला भी नहीं लिया है। सीतारमण के मुताबिक अगर भविष्य में MDR लागू करने का फैसला होता है तो इसका भुगतान मर्चेंट यानी व्यापारियों की ओर से किया जाएगा। आम ग्राहक के UPI ट्रांजैक्शन पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ेगा।
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वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि MDR से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां पेमेंट सिस्टम के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और नई तकनीक में निवेश के लिए कर सकती हैं। इसका फायदा आगे चलकर UPI इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी मिल सकता है।
अभी फैसला बाकी, आगे की प्रक्रिया तय करेगी व्यवस्था
सरकार के मुताबिक UPI पर MDR लागू करने को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया संसद से जुड़े प्रावधानों और UPI तथा सेवा संचालन समिति के फैसले के बाद ही आगे बढ़ेगी। इस समिति की अध्यक्षता NPCI करती है।
यही वजह है कि फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए किसी तरह के नए शुल्क की बात नहीं है। हालांकि भविष्य में MDR की व्यवस्था आती है या नहीं और आती है तो उसका स्वरूप क्या होगा इस पर अभी तस्वीर साफ होना बाकी है। इस बीच एक सर्वे में दावा किया गया है कि अगर UPI लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है तो इसके इस्तेमाल में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ सकती है। इसी आशंका को लेकर डिजिटल पेमेंट से जुड़े लोग भी चिंता जता रहे हैं।
Any MDR on UPI – will kill the one thing in India which is working like clock work i.e. mobile payments. It’s a regressive step – government should reconsider.https://t.co/GchW22rbkf
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— Ashneer Grover (@Ashneer_Grover) August 7, 2026