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VIDEO: भारतीय नौसेना में आज शामिल होगा उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी, पूर्वी समुंद्री तट की सुरक्षा होगी मजबूत

भारतीय नौसेना शुक्रवार को विशाखापत्तनम में एक समारोह में उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को कमीशन करने के लिए तैयार है। समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे। इस समारोह की मेज़बानी भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी करेंगे।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना शुक्रवार को विशाखापत्तनम में एक समारोह में उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को कमीशन करने के लिए तैयार है। समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे। इस समारोह की मेज़बानी भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी करेंगे। तारागिरी को ऐसे समय में शामिल किया जा रहा है जब भारत के पूर्वी समुद्री तट का रणनीतिक और समुद्री महत्व लगातार बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण क्षेत्रीय सुरक्षा की बदलती गतिशीलता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी है। तारागिरी का कमीशन होना नौसेना के उस निरंतर प्रयास को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपने महत्वाकांक्षी बेड़ा विस्तार कार्यक्रम के माध्यम से अपनी युद्धक तत्परता और परिचालन क्षमता को मज़बूत कर रही है।

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प्रोजेक्ट 17A श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफ़ॉर्म के रूप में तारागिरी महज़ एक जहाज़ नहीं है। यह मेक इन इंडिया की भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्ड की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का 6,670 टन का साकार रूप है। मुंबई स्थित मज़गांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने इसे बनाया है। यह फ्रिगेट पिछले डिज़ाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतिनिधित्व करता है। इसका स्वरूप अधिक सुव्यवस्थित है और इसका रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) काफी कम है, जिससे यह घातक स्टील्थ क्षमता के साथ काम कर सकता है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ यह जहाज़ हमारे घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को उजागर करता है। इस तंत्र में अब 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल हैं, जो भारत सरकार की आत्मनिर्भरता पहलों में योगदान दे रहे हैं और हज़ारों भारतीयों को रोज़गार प्रदान कर रहे हैं। कंबाइंड डीज़ल या गैस प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित, तारागिरी को उच्च-गति और उच्च-सहनशक्ति वाली बहुमुखी प्रतिभा और बहु-आयामी समुद्री अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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जहाज़ का हथियार तंत्र विश्व-स्तरीय है, जिसमें सुपरसोनिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणाली शामिल है। ये सभी प्रणालियां एक अत्याधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से निर्बाध रूप से एकीकृत हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि चालक दल खतरों का जवाब पलक झपकते ही पूरी सटीकता के साथ दे सके। समुद्र के एक प्रमुख शिकारी के रूप में अपनी भूमिका से परे, तारागिरी को आधुनिक कूटनीति की जटिलताओं और मानवीय संकटों से निपटने के लिए भी तैयार किया गया है। इसका लचीला मिशन प्रोफ़ाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर तरह के कार्यों के लिए आदर्श बनाता है।

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