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‘आंख और मुंह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…’ अखिलेश ने शंकराचार्य के कार्यक्रम पर लगी शर्तों को लेकर कसा तंज

Lucknow : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज यूपी की राजधानी लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद करने वाले हैं। आशियाना स्थित स्मृति उपवन में कार्यक्रम स्थल से दोपहर 2 बजे इस अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी। लेकिन, प्रशासन ने इस अभियान के लिए 26 शर्तें रखीं है। जिसको लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा है। 

By Abhimanyu 
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Lucknow : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आज यूपी की राजधानी लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शंखनाद करने वाले हैं। आशियाना स्थित स्मृति उपवन में कार्यक्रम स्थल से दोपहर 2 बजे इस अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी। लेकिन, प्रशासन ने इस अभियान के लिए 26 शर्तें रखीं है। जिसको लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा है।

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यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए एक्स पोस्ट पर लिखा, ‘ आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते… किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसीलिए वो ‘शर्तों’ का है अंबार लगाता। भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात उस समझदार समाज को समझ आ रही है।

सपा अध्यक्ष ने आगे लिखा, ‘यहाँ तक कि उस समाज के जो लोग भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद या कहें किसी और तरह के जनप्रतिनिधि हैं, वो भी इस मामले में अपने समाज से मुँह छिपा रहे हैं लेकिन भाजपा की भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंकनेवाले ऐसे भाजपाई जनप्रतिनिधि, अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं। जनता अगले चुनाव में उनको सबक सिखाएगी। इन जनप्रतिनिधियों में से जो कुछ लोग अपने समाज के सच्चे शुभचिंतक हैं वो उन अन्य दलों के संपर्क में हैं जो सदैव सनातन और इस समाज का सम्मान भी करते रहे हैं और जिन्होंने उन्हें सदैव यथोचित मान-स्थान भी दिया है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘और हाँ… ‘कोविड-19’ अभी भी चल रहा है क्या? अगर ये सच है तो सरकार की अपनी किस मीटिंग या भाजपा के किस आयोजन में इसका आख़िरी बार अनुपालन हुआ, उसका प्रमाण दिया जाए। भाजपाई और उनके संगी-साथियों की भूमिगत बैठकों में क्या ये लागू होता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी कारण ‘बाटी-चोखा’ वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गयी थी। अतार्किक बंदिशें लगाना कमज़ोर सत्ता की पहचान होती है। निंदनीय! घोर आपत्तिजनक!! विनाशकाले विपरीत बुद्धि!!!’

बता दें कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 6 मार्च को वाराणसी से यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा के तहत वह मंगलवार शाम को लखनऊ पहुंचे। राजधानी में शंकराचार्य तीन दिवसीय गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शुभारंभ करने वाले थे, लेकिन अब इस कार्यक्रम को सिर्फ एक दिन का ही कर दिया गया है। शंकराचार्य बुधवार को अभियान की शुरुआत के बाद लखनऊ में ही रात्रि विश्राम करने वाले हैं। इसके बाद कल, गुरुवार सुबह की फ्लाइट से अहमदाबाद के लिए रवाना होंगे।

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