नई दिल्ली। देश के 18 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने अपनी विलक्षण सोच और अदम्य साहस से देश को एक नई दिशा दिखाई है। बिना किसी बड़े राजनीतिक या संस्थागत सहारे के, उन्होंने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए देश की सबसे बड़ी परीक्षा (CBSE) में कथित धांधली के खिलाफ आवाज उठाई और दस्तावेजों के माध्यम से सिस्टम को हिला कर रख दिया है। सार्थक सिद्धांत ने सार्वजनिक खरीद पोर्टल के दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड्स और OMR मूल्यांकन प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन कर अनियमितताओं को उजागर किया।
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सार्थक 18 साल का है – पर सोच, साहस और सिद्धांत में किसी से कम नहीं।
उसने और उसके साथी निसर्ग ने वो कर दिखाया जो देश के बड़े मीडिया हाउस, खोजी पत्रकार नहीं कर पाए – CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने रख दिया।
मोदी जी चाहते हैं हमारे युवा reels बनाते रहें, पकौड़े तलते… pic.twitter.com/vjNNVItc2q
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 7, 2026
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उन्होंने साबित किया कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी छात्र दस्तावेजों की ताकत से बड़े-बड़े संस्थानों और सिस्टम में सुधार की मांग कर सकता है। सार्थक सिद्धांत की इस साहसिक खोज ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा, और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्वयं उनसे मुलाकात कर उनके सिद्धांतों की सराहना की और पूरा समर्थन दिया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 18 वर्षीय सार्थक सिद्धांत और उनकी सहयोगी निसर्गा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और सेवा प्रदाता COEMPT के बीच कथित मिलीभगत को उजागर किया। राहुल गांधी ने इसे युवाओं की जीत और सरकार की हार बताया।
CBSE की कक्षा 12 की परीक्षाओं में इस्तेमाल की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाने वाले सार्थक ने उन मुद्दों को सामने लाया, जिन्हें राहुल गांधी के अनुसार बड़े मीडिया संस्थान और खोजी पत्रकार भी उजागर नहीं कर सके। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि सार्थक सिर्फ 18 साल का है, लेकिन सोच, साहस और सिद्धांतों में किसी से कम नहीं। उसने और उसकी सहयोगी निसर्ग ने वह कर दिखाया जो देश के बड़े मीडिया संस्थान और खोजी पत्रकार नहीं कर पाए। उन्होंने CBSE और COEMPT की मिलीभगत को देश के सामने उजागर किया।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि युवा केवल रील बनाएं और सवाल न पूछें, लेकिन इन छात्रों ने सवाल पूछे और उनके जवाब भी खोज निकाले। उन्होंने कहा कि मिस्टर मोदी चाहते हैं कि हमारे युवा रील बनाते रहें, पकौड़े तलते रहें, सवाल न पूछे और आंखें न खोलें, लेकिन इन बच्चों ने सवाल पूछे और जवाब भी ढूंढ़ निकाले। देश का 18 साल का बच्चा CBI से आगे निकल गया। युवाओं की यह जीत वास्तव में सरकार की हार है। यही भारत की असली युवा शक्ति है,जिज्ञासु, जागरूक और सूचित और याद रखिए, देश का भविष्य किसी छलावे में नहीं आने वाला।
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इस बीच, संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति ने कक्षा 12 की परीक्षा के दौरान OSM प्रणाली से जुड़ी छात्रों की समस्याओं की समीक्षा की। CBSE अधिकारियों ने समिति के सवालों का जवाब देते हुए आश्वासन दिया कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर दिया गया है और छात्रों को आवेदन के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
समिति की बैठक के कुछ घंटों बाद केंद्र सरकार ने OSM प्रणाली से जुड़े खरीद संबंधी मामलों की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति गठित की। इस समिति की अध्यक्षता एस राधा चौहान करेंगी, जो क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष हैं। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
विवाद के बाद भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) समेत साइबर सुरक्षा एजेंसियां पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर संभावित साइबर हमलों की निगरानी कर रही हैं। संसदीय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि समिति के सभी सदस्य परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर एकमत हैं। इसमें NEET और CBSE परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि मामले के समाधान के लिए प्रधानमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस मामले में हुई चूक की जिम्मेदारी लेते हुए या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए।
फिलहाल CBSE का पोर्टल छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के आवेदन हेतु खुला है। इसमें UPI, क्रेडिट/डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग सहित पूरी तरह डिजिटल भुगतान व्यवस्था उपलब्ध है।