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मोदी सरकार पर कांग्रेस का जोरदार हमला, केसी वेणुगोपाल, बोले-भाजपा का मुख्य एजेंडा एक राष्ट्र-कोई चुनाव नहीं

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। इसे लेकर लगातार सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। इस बीच, कांग्रेस ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। सबसे पुरानी पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने कहा कि 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' (One Nation, One Election) के पीछे मोदी सरकार (Modi Government) की स्पष्ट मंशा 'एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं' है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। इसे लेकर लगातार सियासी गलियारों में हलचल मची हुई है। इस बीच, कांग्रेस ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। सबसे पुरानी पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ (One Nation, One Election) के पीछे मोदी सरकार (Modi Government) की स्पष्ट मंशा ‘एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं’ है।

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‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ (One Nation, One Election)  को व्यावहारिक नहीं बताते हुए उन्होंने संसद में विधेयकों के पारित होने पर संदेह व्यक्त किया। एक सवाल के जवाब में वेणुगोपाल ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव (One Nation, One Election)  के पीछे की स्पष्ट मंशा एक राष्ट्र-कोई चुनाव (One Nation, One Election) नहीं है। भाजपा का मुख्य एजेंडा ही एक राष्ट्र-कोई चुनाव नहीं है। वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बिल्कुल नहीं चाहते हैं। पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को धीरे-धीरे ध्वस्त करने के लिए वे एक राष्ट्र-एक चुनाव  (One Nation, One Election)  का नया विचार ला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक की अपनी खासियत है। वहीं केरल भी खुद में विशेष है। इसी तरह, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर की भी अपनी विशेषता है। विविधता में एकता इस देश की खूबसूरती है। ये लोग (BJP) लोकतंत्र, विविधता में विश्वास नहीं करते हैं। यह एक राष्ट्र-एक चुनाव बिल्कुल व्यवहारिक नहीं है। मुझे नहीं लगता कि यह संसद में पारित होगा। हालांकि, देखते हैं क्या होता है।

आज पेश किया गया ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विधेयक

बता दें, लोकसभा में मंगलवार को तीखी बहस के बाद एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था करने वाले विधेयकों को पेश किया गया। विपक्षी दलों ने मसौदा कानूनों को संघीय ढांचे पर हमला करार दिया, हालांकि सरकार ने इस आरोप को खारिज कर दिया।

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