Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. कर्नाटक के CM बने डीके शिवकुमार, संविधान हाथ में लेकर ली शपथ, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने दिलाई शपथ

कर्नाटक के CM बने डीके शिवकुमार, संविधान हाथ में लेकर ली शपथ, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने दिलाई शपथ

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने भारत के संविधान की प्रति हाथ में लेकर बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। शपथ समारोह के दौरान उन्होंने संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का संदेश दिया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत (Governor Thawar Chand Gehlot) ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, सिद्धारमैया समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। संविधान की प्रति के साथ शपथ लेने का यह दृश्य समारोह का प्रमुख आकर्षण बना और इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। जी परमेश्वर ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

पढ़ें :- IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे पर यूपी में राजनीति तेज, बीजेपी प्रवक्‍ता का दावा, बोले-राहुल गांधी से मिलने के बाद दिया इस्तीफा

कर्नाटक में इन मंत्रियों ने ली शपथ

सीएम डीके शिवकुमार के साथ इन मंत्रियों ने ली शपथ

पढ़ें :- वाजपेयी जी के जमाने में पेपर लीक क्यों नहीं हुआ? आज सरकार खुद कर रही है घोटाले, मुरली मनोहर जोशी ने केंद्र की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल

केएच मुनियप्पा

केजे जॉर्ज

एमबी पाटिल

रामलिंगारेड्डी

सतीश जराकिहोली

पढ़ें :- देश में संविधान और BJP-RSS की विचारधारा के बीच लड़ाई, दलितों के साथ अत्याचार आज तक खत्म नहीं हुआ : राहुल गांधी

कृष्णबैरे गौड़ा

प्रियांक खड़गे

यूटी खादर

ईश्वर खंड्रे

यतींद्र सिद्धारमैया

बैराती सुरेश

पढ़ें :- वित्तीय अनियमितता मामले में घिरे कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र का मंत्रिमंडल से इस्तीफा, बोले- पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए हट रहा हूं

शरणप्रकाश पाटिल

खड़गे का बड़ा संतुलन फॉर्मूला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC का सदस्य बनाकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि सिद्धारमैया खुद को पूरी तरह अलग-थलग महसूस करें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उन्हें सम्मानजनक भूमिका देने और पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। इससे एक तरफ सिद्धारमैया खेमे को संदेश गया है, वहीं दूसरी तरफ डीके शिवकुमार को भी स्पष्ट संकेत मिला है कि पार्टी नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है।
Advertisement