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Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भेदभाव के अंधेरे में बराबरी की रोशनी जलाई , जयंती हमें महान व्यक्तित्व की याद दिलाती है

By अनूप कुमार 
Updated Date

Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती हमें एक ऐसे महान व्यक्तित्व की याद दिलाती है, जिन्होंने अपने ज्ञान, संघर्ष और दृढ़ संकल्प से भारतीय समाज को नई दिशा दी। बाबा साहेब का पूरा जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि एक व्यक्ति का संघर्ष पूरे देश की किस्मत बदल सकता है, जिसने भेदभाव के अंधेरे में

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बराबरी की रोशनी जलाई
आज हम सब जो भी पढ़ पा रहे हैं और अपने सपनों को पूरा करने का हक रखते हैं, वह डॉ. अंबेडकर के संघर्ष और उनके दिए हुए अधिकारों का परिणाम है। उन्होंने शिक्षा और समानता के जरिए लाखों ज़िंदगियों में उजाला लाया।

भारतीय समाज को नई दिशा
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन को समानता, न्याय और मानव अधिकारों की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। कठिन परिस्थितियों और सामाजिक भेदभाव का सामना करते हुए भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।

भारतीय संविधान के निर्माण में योगदान
डॉ. अंबेडकर का मानना था कि एक मजबूत समाज की नींव शिक्षा और जागरूकता पर टिकी होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे शिक्षित बनें, संगठित रहें और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें। भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान अमूल्य है, जिसने देश के हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान का हक दिया।

प्रारूप समिति के अध्यक्ष: 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने उन्हें ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिसके बाद उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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संवैधानिक उपचारों का अधिकार: उन्होंने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को संविधान की “आत्मा और हृदय” बताया, जो नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का हक देता है।

उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर बाधा को पार किया जा सकता है। डॉ. अंबेडकर सिर्फ एक महान नेता ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत हैं, जिनके विचार आज भी समाज को आगे बढ़ने की राह दिखाते हैं।

इस अंबेडकर जयंती पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके आदर्शों का पालन करेंगे और एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देंगे जहाँ भेदभाव के लिए कोई जगह न हो और हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिल सके।

रिपोर्ट: कौशिकी गुप्ता

 

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