UCC Controversy: समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी 21 NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। मदनी ने सवाल उठाया है कि देश संविधान के मुताबिक चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे के आधार पर। उनका कहना है कि UCC के जरिए मुसलमानों को संविधान से मिले धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े अधिकार प्रभावित होंगे।
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अरशद मदनी ने साफ कहा कि मुस्लिम समुदाय अपने धर्म और धार्मिक कानूनों से समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के कई प्रावधान धार्मिक ग्रंथों पर आधारित हैं और इन्हें समान नागरिक संहिता के दायरे में लाने का विरोध किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संविधान के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजातियों को UCC से छूट दी जा सकती है, तो संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मुसलमानों को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता?
— Arshad Madani (@ArshadMadani007) September 16, 2026
उन्होंने गौहत्या से जुड़े कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर देश में इस मुद्दे पर एक समान कानून नहीं है, तो धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों के मामले में एकरूपता पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। मदनी ने यह भी बताया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने उत्तराखंड में लागू UCC को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। उनके मुताबिक, इस मामले में अब तक कई सुनवाई हो चुकी हैं और संगठन की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल समेत अन्य वकील अदालत में पेश हो चुके हैं।
दूसरी तरफ, UCC को लेकर केंद्र सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है। उत्तराखंड में UCC लागू है, जबकि गुजरात और असम में भी इसे लेकर कानून की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
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ऐसे में UCC को लेकर बहस अब सिर्फ केंद्र और विपक्ष तक सीमित नहीं है। अलग-अलग समुदायों, संगठनों और NDA के सहयोगी दलों के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। फिलहाल अरशद मदनी का विरोध और सरकार का UCC लागू करने का संकल्प आमने-सामने है। आगे अदालतों के फैसले और अलग-अलग राज्यों में होने वाली विधायी प्रक्रिया इस मुद्दे की दिशा तय करने में अहम होगी।