नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ सरकार ने PAN कार्ड से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव कर दिया है, जिनका सीधा असर आम लोगों के बैंकिंग, खरीदारी और बड़े लेनदेन पर पड़ने वाला है। इन नए नियमों का मकसद वित्तीय लेनदेन को ज्यादा पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना...
नई दिल्ली: नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ सरकार ने PAN कार्ड से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव कर दिया है, जिनका सीधा असर आम लोगों के बैंकिंग, खरीदारी और बड़े लेनदेन पर पड़ने वाला है। इन नए नियमों का मकसद वित्तीय लेनदेन को ज्यादा पारदर्शी बनाना और टैक्स चोरी पर रोक लगाना है। बैंक डिपॉजिट से लेकर होटल बिल, प्रॉपर्टी खरीद और वाहन खरीद तक—हर जगह PAN की भूमिका अब और ज्यादा अहम हो गई है।
वाहन खरीदने पर नया नियम
अब वाहन खरीदने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले हर कार या बाइक खरीदने पर PAN कार्ड देना जरूरी होता था, लेकिन अब सरकार ने इसमें राहत दी है। नए नियम के मुताबिक, अगर आप 5 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का कोई भी वाहन खरीदते हैं, तभी PAN कार्ड देना अनिवार्य होगा, चाहे वह टू-व्हीलर हो या फोर-व्हीलर। इससे छोटे खरीदारों को थोड़ी राहत मिलेगी, जबकि महंगे वाहन खरीदने वालों पर नजर रखी जा सकेगी।
PAN बनवाने के नियम सख्त
PAN कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को भी अब सख्त कर दिया गया है। पहले केवल आधार कार्ड के आधार पर PAN बन जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब PAN बनवाने के लिए आपको जन्मतिथि और पते से जुड़े अन्य दस्तावेज भी देने होंगे, जैसे बर्थ सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य वैध पहचान पत्र। इसका मकसद फर्जी PAN कार्ड बनने से रोकना और डेटा को ज्यादा विश्वसनीय बनाना है।
बैंक ट्रांजैक्शन की लिमिट बदली
PAN से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव बैंकिंग ट्रांजैक्शन में किया गया है। पहले एक बार में 50 हजार रुपये जमा करने पर PAN दिखाना जरूरी होता था, लेकिन अब इस नियम को बदलकर सालाना लिमिट कर दिया गया है। अब एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा का ट्रांजैक्शन होने पर PAN देना अनिवार्य होगा। इससे बार-बार PAN दिखाने की जरूरत कम होगी, लेकिन बड़े ट्रांजैक्शन पर नजर बनी रहेगी।
प्रॉपर्टी खरीदने पर राहत
प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। पहले अगर किसी प्रॉपर्टी की कीमत या सर्किल रेट 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा होता था, तो PAN कार्ड देना जरूरी होता था। अब इस लिमिट को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के खरीदारों को राहत मिलेगी, जबकि बड़े सौदों पर निगरानी जारी रहेगी।
होटल और रेस्टोरेंट बिल पर नया नियम
होटल और रेस्टोरेंट में कैश पेमेंट करने वालों के लिए भी नियम बदल गए हैं। पहले 50 हजार रुपये से ज्यादा का बिल चुकाने पर PAN देना जरूरी होता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही बीमा प्रीमियम के मामले में भी यही बदलाव लागू किया गया है, जिससे छोटे लेनदेन में लोगों को आसानी होगी।
2 लाख से ऊपर ट्रांजैक्शन पर सख्ती जारी
हालांकि, सरकार ने एक अहम नियम पहले जैसा ही रखा है। अगर कोई ऐसा ट्रांजैक्शन है, जो किसी विशेष कैटेगरी में नहीं आता, तो 2 लाख रुपये से ज्यादा के किसी भी लेनदेन पर PAN देना अनिवार्य होगा। इसका मकसद बड़े कैश ट्रांजैक्शन पर नजर रखना और अनियमित लेनदेन को रोकना है।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से लागू हुए PAN कार्ड के ये नए नियम आम लोगों को कुछ मामलों में राहत देते हैं, तो कुछ जगहों पर सख्ती भी बढ़ाते हैं। छोटे ट्रांजैक्शन में जहां नियम आसान किए गए हैं, वहीं बड़े लेनदेन पर सरकार की नजर और कड़ी हो गई है। ऐसे में नए वित्त वर्ष में हर व्यक्ति के लिए इन नियमों को समझना और उसी हिसाब से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करना जरूरी हो गया है।