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शॉटगन ने BJP को आसनसोल में खामोश कर रचा इतिहास, शत्रु पर बरसी वोटों की ममता

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की आसनसोल लोकसभा सीट उपचुनाव (Asansol Lok Sabha seat by-election) की शनिवार को हुई मतगणना में तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha)ने बड़े मार्जिन से जीत दर्ज इतिहास रच दिया है। बंगाल पहुंचे बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा (Bihari Babu Shatrughan Sinha) 2,64913 वोटों से जीत दर्ज की है। बता दें कि राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने में जुटे बिहारी बाबू ने आसनसोल लोकसभा उपचुनाव (Asansol Lok Sabha seat by-election)  में जीत दर्ज कर टीएमसी (TMC) को बड़ी राहत दी है। आसनसोल (Asansol) में तृणमूल जीत को तरस रही थी, अब शत्रुघ्न सिन्हा ने जीत दिलाई है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की आसनसोल लोकसभा सीट उपचुनाव (Asansol Lok Sabha seat by-election) की शनिवार को हुई मतगणना में तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha)ने बड़े मार्जिन से जीत दर्ज इतिहास रच दिया है। बंगाल पहुंचे बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा (Bihari Babu Shatrughan Sinha) 2,64913 वोटों से जीत दर्ज की है। बता दें कि राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने में जुटे बिहारी बाबू ने आसनसोल लोकसभा उपचुनाव (Asansol Lok Sabha seat by-election)  में जीत दर्ज कर टीएमसी (TMC) को बड़ी राहत दी है। आसनसोल (Asansol) में तृणमूल जीत को तरस रही थी, अब शत्रुघ्न सिन्हा ने जीत दिलाई है।

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आसनसोल लोकसभा उपचुनाव (Asansol Lok Sabha seat by-election)  भाजपा (BJP) और टीएमसी (TMC) के लिए नाक की लड़ाई बनी हुई थी। यहां से 2019 में भाजपा की तरफ से बाबुल सुप्रियो ने चुनाव जीता था, लेकिन बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद बाबुल सुप्रियो ने आसनसोल लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। हालांकि उस समय बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo)  ने कहा था कि वह राजनीति में वापस नहीं आना चाहते हैं। लेकिन बाद में टीएमसी (TMC)  से बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) ने बालीगंज से विधानसभा का उपचुनाव लड़ा है। बाबुल सुप्रियो ने भी जीत दर्ज की है।

2019 में छोड़ा था बीजेपी का साथ

सिन्हा 1991 में बीजेपी (BJP)  से जुड़े थे। पार्टी में उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं। राज्यसभा सदस्य बनाया और केन्द्र में मंत्री बनाया। पटना साहिब (Patna Sahib) से टिकट दिया और वे लोकसभा चुनाव भी जीते। 2014 में उन्हें केन्द्र में मंत्री पद नहीं मिला तो भाजपा (BJP)  से संबंधों में खटास आ गई।

2019 में भाजपा (BJP)  ने उनकी जगह रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) को पटना साहिब (Patna Sahib)  से उम्मीदवार बना दिया तो शत्रु ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वे भाजपा (BJP)   में करीब 28 साल रहे। इसके साथ ही कांग्रेस में भी उनका सफर मात्र तीन साल का ही रहा है।

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पटना साहिब (Patna Sahib)  से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। भाजपा (BJP)  पर शत्रुघ्न इतने भड़के कि बेटे लव सिन्हा को कांग्रेस के टिकट पर भाजपा के नितिन नवीन के खिलाफ बांकीपुर से चुनाव लड़वाया, लेकिन बेटे की भी हार हो गई। शत्रुघ्न की पत्नी पूनम केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह (Union Minister Rajnath Singh) के खिलाफ सपा के टिकट पर लखनऊ से चुनाव लड़ीं और करारी शिकस्त मिली थी।

बिहारी बाबू का राजनीतिक सफरनामा

शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) दो बार बिहार से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।
2003 से 2004 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे।
2004 में अटल सरकार में जहाजरानी मंत्री बने।
2009 में पहली बार पटना साहिब (Patna Sahib)  से लोकसभा पहुंचे।
2014 में दोबारा पटना साहिब (Patna Sahib)  से लोकसभा सांसद चुने गए।

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