PM Modi chaired CCS meeting: पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा के लिए CCS बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए LPG और LNG की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र के उपायों की समीक्षा की गई। वहीं, कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने इस बैठक को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
PM Modi chaired CCS meeting: पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा के लिए CCS बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए LPG और LNG की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती और बिजली क्षेत्र के उपायों की समीक्षा की गई। वहीं, कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने इस बैठक को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई CCS बैठक पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “CCS बैठक में जो कुछ भी चर्चा हुई हो, ज़मीनी हकीकत यह है कि लोग LPG सिलेंडरों के लिए जूझ रहे हैं। कीमतें दोगुनी और तिगुनी तक हो गई हैं, और सिलेंडर 1,800-2,000 रुपये में बिक रहे हैं। कमरा शेयर करके रहने वाले छात्र और तंग जगहों पर रहने वाले मज़दूर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और उन्हें पलायन करने पर भी मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार ने क्या इंतज़ाम किए हैं? सिलेंडर इतनी ज़्यादा कीमतों पर कैसे बिक रहे हैं? यह मुझे उस कहावत की याद दिलाता है कि जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। हमें इसकी याद तब आई, जब आप असम के एक चाय बागान में नाच का लुत्फ़ उठा रहे थे।”
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए पीएम मोदी की ओर से हरसंभव प्रयास करने के आह्वान पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, “हमारी सरकार को पश्चिम एशिया युद्ध पर बहुत पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर देना चाहिए था, लेकिन वह अब अमेरिका की कठपुतली बन गई है।”
CCS की बैठक पर PDP विधायक मुंतज़िर मेहदी ने कहा, “ईरान और इज़रायल के बीच चल रहा संघर्ष सिर्फ़ इन दो देशों तक ही सीमित नहीं है, और इसका असर भी सिर्फ़ इन्हीं तक सीमित नहीं रहेगा। हम पहले से ही दुनिया भर में इसके असर को देख रहे हैं। अगर हम भारत की बात करें, तो हम भी इससे प्रभावित हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा संकट और इससे जुड़ी दूसरी चुनौतियों की वजह से। एक ज़िम्मेदार देश के तौर पर, चाहे वह भारत हो या कोई और देश, इस संघर्ष को शांत करने की दिशा में काम करने की ज़रूरत है। तनाव कम करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि इस स्थिति के बुरे नतीजों को कम से कम किया जा सके और दुनिया को इसके हानिकारक प्रभावों से बचाया जा सके।”