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विदूर नीति : तरक्की के लिए धैर्य और दूरदर्शिता जरूरी, आज हजारों साल बाद भी है प्रासंगिक

By santosh singh 
Updated Date

विदूर नीति: अगर आपको आपके कड़ी मेहनत के बावजूद भी सफलता नहीं मिल रही है तो हो सकता है कि आपकी संगति गलत हो। तो आइए, जानते हैं विदूर नीति (Vidur Niti) के अनुसार, कि आपको किन चार लोगों से दूरी बनाना आपके भविष्य के लिए बहुत ही जरूरी हैं।

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महाभारत काल (Era of  Mahabharata) के समय में सबसे बुद्धिमान और नीतिशास्त्र के जानकार महात्मा विदुर (Mahatma Vidur) द्वारा कही गई बातें आज हजारों साल बाद भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितना हजारों साल पहले हुआ करती थी। उनके बताए गए जीवन के सिद्धांत व्यक्ति को सफलता के शिखर पर पहुंचाने के साथ—साथ पतन से भी बचाते हैं। महात्मा विदुर के कथन के अनुसार किसी भी मनुष्य की पहचान उसकी संगति से होती है। जिस तरह से पानी की एक बूंद गर्म तवे पर पड़ते ही नष्ट हो जाती है, लेकिन वहीं पानी की एक बूंद कमल के पत्ते पर पड़ती हैं तो मोती की तरह चमकती है, ठीक वैसे ही हमारी सफलता भी हमारी संगति पर पर निर्भर करती है कि हम किन लोगों के बीच उठते-बैठते हैं।

विदुर नीति (Vidur Niti) के ‘प्रजागर पर्व’ में कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है, जिनका साथ व्यक्ति के चरित्र के साथ-साथ उसके भविष्य को भी बर्बाद कर सकता है।

अत्यधिक लालची लोग : महात्मा विदुर (Mahatma Vidur) के अनुसार, इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसका लोभ यानी लालच है। जिसस व्यक्ति की नज़र हमेशा दूसरों की संपति या सफलता पर होती है, वह कभी भी किसी का सच्चा मित्र नहीं हो सकता। लालची व्यक्ति अपने फायदे के लिए दुसरों को किसी भी मुसीबत में डाल सकता है। ऐसे लोग केवल तभी तक आपके साथ रहते हैं जब तक उनको आपसे कोई लाभ मिल रहा हो और जैसे ही आपका बुरा समय शुरू होगा,वैसे ही ये सबसे पहले आपका साथ छोड़े देंगें।

झूठ बोलने और छल करने वाले व्यक्ति : विदुर नीति (Vidur Niti) के अनुसार, जो व्यक्ति हर बात पर झूठ बोलता है या छल-कपट करता है, उससे हमेशा मीलों दूर रहना चाहिए। इस तरह के लोगों पर भरोसा करना अंधेरे कुएं में कूदने जैसा है क्योंकि वे अपनी बातों के जाल में फंसाकर आपको गलत रास्ते पर ले जाते हैं, जिससे समाज में आपकी प्रतिष्ठा और छवि खराब हो सकती है।

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बिना सोच-विचार किए काम करने वाले व्यक्ति : जो व्यक्ति किसी काम को करने से पहले उसके परिणाम के बारे में सोचते है वहीं बुद्धिमान व्यक्ति है। विदुर जी कहते हैं कि जो लोग बिना सोचे-समझे उतावलेपन में निर्णय लेते हैं, वे न केवल अपनेआप को ही डूबाते हैं बल्कि अपने साथियों को भी ले डूबते हैं। ऐसे लोगों के साथ में रहने से आप भी जल्दबाजी में गलत फैसला ले सकते हैं। जीवन में तरक्की के लिए धैर्य और दूरदर्शिता बहुत जरूरी है, जो ऐसे लोगों के पास बिल्कुल ही नहीं होती।

अहंकारी और गुस्सैल स्वभाव वाले व्यक्ति : क्रोध और अहंकार बुद्धी का हरण कर लेते हैं। विदुर नीति (Vidur Niti) के अनुसार, अहंकारी व्यक्ति अपनेआप को सबसे ऊपर मानता है और दूसरों का अपमान करते वक्त जरा भी संकोच नहीं करता। वहीं, गुस्सैल व्यक्ति उन्माद में आकर आपका भी बहुत नुकसान करवा सकता है। क्रोध में लिया गया एक गलत निर्णय आपके कई सालों की मेहनत को मिट्टी में मिला सकता है। सिर्फ यहीं नहीं, अहंकारी लोग कभी आपको आगे बढ़ने की सही सलाह नहीं देंगे क्योंकि वे लोग किसी अन्य को खुद से श्रेष्ठ नहीं देखना चाहतें।

क्‍या है सफलता का मूल मंत्र!

महात्मा विदुर (Mahatma Vidur) का स्पष्ट मानना है कि यदि आप अपने जीवन में शांति और उन्नति चाहते हैं, तो ऐसे चार स्वभाव वाले लोगों को अपनी ‘फ्रेंड लिस्ट’ से तुरंत बाहर कर दें। बुद्धिमान और संयमी लोगों का साथ भले ही कम मिले, लेकिन उनका साथ आपको जीवन की हर परीक्षा में सफल बना सकता हैं।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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