ढाका। बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शनों ने एक बार फिर हालात तनावपूर्ण कर दिए हैं। यहां प्रदर्शनकारियों के विरोध, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बीच औद्योगिक गतिविधियों पर भी बड़ा असर पड़ा है। इस हालात को देखते हुए 600 से अधिक फैक्ट्रियों के बंद होने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम से आम जनजीवन प्रभावित होने के साथ-साथ देश के कपड़ा और गारमेंट उद्योग पर भी संकट गहराने की आशंका है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट उद्योग की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां बड़ी संख्या में लोग इसी क्षेत्र में काम करते हैं।
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क्यों हो रहा है विरोध?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश में गारमेंट फैक्ट्री के कर्मचारी न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 12,500 टका है, जिसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग की जा रही है। वहां के स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों के कारण मौजूदा वेतन में परिवार चलाना काफी मुश्किल हो गया है।
इस प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका, गाजीपुर, सावर, अशुलिया और मीरपुर समेत कई औद्योगिक इलाकों में सड़कें जाम की गईं। साथ ही यहां कुछ जगहों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
690 फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित
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रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते 2 नवंबर को कम से कम 690 गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन रोकना पड़ा। इससे करीब 17 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। वहीं, हिंसा और तोड़फोड़ के मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने कर्मचारियों की वेतन संबंधी मांगों पर विचार करने के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड का गठन किया है। इसके बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
आपको बता दें कि बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह उद्योग करीब 40 लाख लोगों को रोजगार देता है और देश के कुल निर्यात में 80 प्रतिशत से अधिक योगदान करता है। ऐसे में फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने से अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर, निर्यात और डिलीवरी प्रभावित होने की आशंका है।