मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भविष्य की जरूरतों के मुताबिक राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए “विकसित यूपी@2047” विजन के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसके अनुपालन में प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों को अत्याधुनिक, डिजिटल, सुगम और विश्वस्तरीय बनाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया है।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भविष्य की जरूरतों के मुताबिक राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए “विकसित यूपी@2047” विजन के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसके अनुपालन में प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों को अत्याधुनिक, डिजिटल, सुगम और विश्वस्तरीय बनाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री के समक्ष पेश किए गए इस रोडमैप का मुख्य फोकस राज्य के शहरों में जीवन सुगमता बढ़ाना, बुनियादी नागरिक सेवाओं को सशक्त करना और सतत एवं संतुलित विकास के जरिए नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना है।
एससीआर के साथ विकसित होंगे क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र
मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार शहरी क्षेत्रों का विकास सुलभ प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले स्तंभों के तौर पर किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश की राजधानी लखनऊ को राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के रूप में विकसित करने के साथ-साथ राज्य में क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जो राज्य में आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख हब बनेंगे। राज्य की प्राकृतिक एवं भौगोलिक परिस्थियों को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रीय आर्थिक केंद्रों का विकास किया जाएगा, जिससे प्रदेश में निवेश, रोजगार और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का किया जाएगा विकास
‘विकसित यूपी@2047’ विजन के तहत राज्य में शहरी परिवहन को आधुनिक और समावेशी बनाने के लिए मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसमें मेट्रो, रैपिड रेल, इलेक्ट्रिक बसें और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली शामिल होगी। सरकार का लक्ष्य है कि सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाकर इसे मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी तक लाया जाए। इससे राज्य के निवासियों को सस्ता परिवहन उपलब्ध कराने के साथ ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से भी निजात दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही “लिवेबल सिटीज मिशन” के तहत नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार जैसी आवश्यक सुविधाएं उनके घर से 15 मिनट की दूरी पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे न केवल जनता के समय की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
जीआईएस आधारित संपत्ति मानचित्रण और कर प्रणाली
शहरी प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए जीआईएस (जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम) आधारित संपत्ति मानचित्रण और कर प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे कर संग्रह अधिक पारदर्शी और सटीक होगा। साथ ही, एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की स्थापना के माध्यम से शहरों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में नागरिक सेवाओं को 100 प्रतिशत डिजिटल बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे नगरीय प्रशासन में पारदर्शिता और सेवा वितरण की गति में सुधार होगा। रोडमैप में राज्य के सभी जिलों में विकास प्राधिकरणों का गठन कर 100 प्रतिशत जल आपूर्ति कवरेज और थीम आधारित टाउनशिप का विकास करने की योजना भी शामिल है। उत्तर प्रदेश शहरी वेधशाला की स्थापना कर डेटा आधारित योजनाओं और पूर्वानुमानों को बढ़ावा दिया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से “स्पंज सिटी” को प्रोत्साहन
रोडमैप के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए “स्पंज सिटी” पहल को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन, झीलों और तालाबों का पुनरुद्धार तथा प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को संरक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य भूजल स्तर को बढ़ाना, बाढ़ के जोखिम को कम करना और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है। साथ ही, बड़े पैमाने पर अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर शून्य-लैंडफिल शहरों का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। वहीं समावेशी विकास के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए आवास योजनाओं को तेज किया जाएगा। मिश्रित भूमि उपयोग और योजनाबद्ध शहरीकरण के माध्यम से सभी वर्गों के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में इन रणनीतिक बदलावों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के शहरों को आत्मनिर्भर, समावेशी बनाया जा सकेगा। साथ ही प्रदेश के शहरों का विकास भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार किया जाएगा कि वर्ष 2047 तक वे न केवल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हों, बल्कि वैश्विक विकास की दौड़ में अग्रणी भूमिका निभा सकें।