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अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर निशाना, बोले-ऐतिहासिक हार की शर्मिंदगी से बचने के लिए वो अपनी नाव में ही छेद करने लगे

अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि, भाजपा की हार की क्रोनोलॉजी: महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार की वजह से सबसे पहले आम जनता ने भाजपा का साथ छोड़ा। ⁠फिर संविधान और आरक्षण को ख़त्म करने की साज़िश रचनेवाली भाजपा के ख़िलाफ़ शोषित, दमित, वंचित लोगों ने भाजपा का साथ छोड़ा। इसके बाद किसानों को भी लगा कि जो हमारे ख़िलाफ़ काले क़ानून लाए, जिन्होंने रास्ते में कील-कांटे बिछाए उन किसान-विरोधियों का साथ क्या देना?

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, इस चुनाव में महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार की वजह लोगों ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है, जिसके कारण वो चुनाव हार रहे हैं। दरअस, लोकसभा चुनाव 2024 के तीन चरणों के चुनाव हो चुके हैं, जबकि चौथे चरण के लिए सभी दलों ने प्रचार प्रसार तेज कर दिया है। ऐसे में अब एक दूसरे पर हमले तेज हो गए हैं।

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अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि, भाजपा की हार की क्रोनोलॉजी: महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार की वजह से सबसे पहले आम जनता ने भाजपा का साथ छोड़ा। ⁠फिर संविधान और आरक्षण को ख़त्म करने की साज़िश रचनेवाली भाजपा के ख़िलाफ़ शोषित, दमित, वंचित लोगों ने भाजपा का साथ छोड़ा। इसके बाद किसानों को भी लगा कि जो हमारे ख़िलाफ़ काले क़ानून लाए, जिन्होंने रास्ते में कील-कांटे बिछाए उन किसान-विरोधियों का साथ क्या देना?

इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि, युवाओं को भी लगा कि जो नौकरी-रोज़गार को षड्यंत्र रचकर ख़त्म कर रहे हैं, उनको वापस लाकर अपना भविष्य बर्बाद क्यों करना? ⁠फिर महिलाओं को भी लगा कि जो मणिपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, कर्नाटक और खेल तक में हो रहे नारी के अभूतपूर्व अत्याचार पर नहीं बोल रहे हैं उनपर भरोसा करना, ख़ुद को धोखा देना है।

उन्होंने आगे लिखा कि, पूंजीपतियों को लगा कि जो घोड़ा जीत नहीं रहा उसको दाना-पानी क्यों डाला जाए? ⁠फिर मीडिया को लगा कि हारनेवाले के गीत क्यों गाए जाएं? ख़ुद भाजपा को लगा कि जब सब मिलकर हमें हरा रहे हैं, तो जाते-जाते अपनी हार का ढीकरा दूसरों पर डालकर, ऐतिहासिक हार की शर्मिंदगी से कैसे बचा जाए तो वो अपनी नाव में ही छेद करने लगे क्योंकि उन्हें लगा हार का सामना करने से अच्छा डूबना है। सारांश: भाजपा चुनाव हार गयी है।

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