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Solar Storm: 16 लाख किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आ रहा सौर तूफान, इस दिन धरती से हो सकती है टक्कर

अभी तक दुनिया कोरोना और डेल्टा+ की मार से जूझ रहा था लेकिन अगर हम आपसे कहें कि सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान भी हमारी तरफ तेजी बढ़ रहा है तो आप काया कहेंगे । शायद आपके भी मुह से ये निकले कि अब हम धरती पर चौतरफा प्रलय से घिर चुकी हैं।

By आराधना शर्मा 
Updated Date

All Round Cataclysm On Earth Solar Storm Coming At A Speed Of 16 Lakh Km Per Hour May Collide With Earth On This Day

 वॉशिंगटन: अभी तक दुनिया कोरोना और डेल्टा+ की मार से जूझ रहा था लेकिन अगर हम आपसे कहें कि सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान भी हमारी तरफ तेजी बढ़ रहा है तो आप काया कहेंगे । शायद आपके भी मुह से ये निकले कि अब हम धरती पर चौतरफा प्रलय से घिर चुकी हैं। दरअसल, सूरज की सतह से पैदा हुआ शक्तिशाली सौर तूफान 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है।

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यह सौर तूफान रविवार या सोमवार को किसी भी समय पृथ्वी से टकरा सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस तूफान के कारण सैटेलाइट सिग्नलों में बाधा आ सकती है। विमानों की उड़ान, रेडियो सिग्नल, कम्यूनिकेशन और मौसम पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

स्पेसवेदर डॉट कॉम वेबसाइट के अनुसार, सूरज के वायुमंडल से पैदा हुए इस सौर तूफान के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाले अंतरिक्ष का एक क्षेत्र में काफी प्रभाव देखने को मिल सकता है। उत्तरी या दक्षिणी अक्षांशों पर रहने वाले लोग रात में सुंदर आरोरा देखने की उम्मीद कर सकते हैं। ध्रुवों के नजदीक आसमान में रात के समय दिखने वाली चमकीली रोशनी को आरोरा कहते हैं।

16 लाख किमी की रफ्तार से बढ़ रहा तूफान

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि ये हवाएं 1609344 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हो सकता है कि इसकी स्पीड और भी ज्यादा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष से महातूफान फिर आता है तो धरती के लगभगर हर शहर से बिजली गुल हो सकती है।

 क्या होगा पृथ्वी पर असर?

सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गरमा सकता है जिसका सीधा असर सैटलाइट्स पर हो सकता है। इससे जीपीएस नैविगेशन, मोबाइल फोन सिग्नल और सैटलाइट टीवी में रुकावट पैदा हो सकती है। पावर लाइन्स में करंट तेज हो सकता है जिससे ट्रांसफॉर्मर भी उड़ सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर ऐसा कम ही होता है क्योंकि धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।

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