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Baisakhi 2026 : नई फसल के स्वागत में पकवानों से महके घर, केसरिया मीठे चावलों की मची धूम

आज पूरे उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा में बैसाखी का त्योहार रबी फसल कटने की खुशी मेे धूमधाम से मनाया जा रहा है। साथ ही इस पर्व पर परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली/चंडीगढ़| आज पूरे उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा में बैसाखी का त्योहार रबी फसल कटने की खुशी मेे धूमधाम से मनाया जा रहा है। साथ ही इस पर्व पर परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

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मुख्य पकवान और क्षेत्रीय विशेषताएं

मीठे चावल : बैसाखी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। आज लगभग हर घर में केसर, इलायची और सूखे मेवों से तैयार ‘मीठे चावल’ मुख्य आकर्षण हैं। इस रंग समृद्धि और नई फसल का प्रतीक माना जाता है।

सरसों का साग और मक्की की रोटी : सर्दियों का मुख्य भोजन होने के बावजूद भी बैसाखी के अवसर पर खेतों की ताजा उपज के साथ इसे पारंपरिक तरीके से खाने की थाली में परोसा जा रहा है। इसके साथ ही सफेद मक्खन और गुड़ का संगम भोजन का स्वाद दोगुना कर रहा है।

छोले-भटूरे और पूरी-छोले: गुरुद्वारों और मेलों में आज मुख्य रूप से छोले-भटूरे और आलू-पूरी के भंडारे हो रहे हैं। बैसाखी मेलों में इन व्यंजनों की भारी मांग देखने को मिल रही है।

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प्रसाद : गुरुद्वारों में विशेष रूप से ‘कड़ाह प्रसाद’ (गेहूं के आटे का हलवा) तैयार कर साथ में बांटा जा रहा है। यह प्रसाद शुद्ध देसी घी से बना होता है जिसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसके साथ ही गर्मी की शुरुआत को देखते हुए मीठी लस्सी और सत्तू के शरबत का सेवन भी आज बहुत बड़ी मात्रा में किया जा रहा है।

बाजार का हाल : मिठाई की दुकानों पर आज जलेबी, लड्डू और पिन्नी की भारी बिक्री दर्ज की गई है। कई रेस्तरां ने बैसाखी के अवसर पर विशेष ‘पंजाबी थाली’ पेश की है, जिसमें पारंपरिक स्वादों को आधुनिक तरीके से परोसा गया है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह त्योहार भोजन के साथ-साथ किसानों की कड़ी मेहनत और मिट्टी के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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