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Research : भोजन में साधारण बदलाव कर सप्लीमेंट विटामिन-डी की प्रभावशीलता को बहुत हद की जा सकती है वृद्धि

हाल ही के हेल्थ रिपोर्टों और स्पेशलिस्ट्स (जिनमें वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट भी शामिल हैं) के अनुसार भोजन में साधारण बदलाव करके सप्लीमेंट विटामिन-डी की प्रभावशीलता को बहुत हद तक बढ़ाया जा सकता है। स्टडीज से पता चलता है कि दिन के सबसे भारी भोजन के साथ विटामिन-डी (Vitamin D) लेने से इसके अवशोषण में 30 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

By santosh singh 
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लखनऊ / नई दिल्ली। हाल ही के हेल्थ रिपोर्टों और स्पेशलिस्ट्स (जिनमें वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट भी शामिल हैं) के अनुसार भोजन में साधारण बदलाव करके सप्लीमेंट विटामिन-डी की प्रभावशीलता को बहुत हद तक बढ़ाया जा सकता है। स्टडीज से पता चलता है कि दिन के सबसे भारी भोजन के साथ विटामिन-डी (Vitamin D) लेने से इसके अवशोषण में 30 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

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मेडिकल साइंस के अनुसार, विटामिन-डी वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका अर्थ है कि इसे रक्तप्रवाह में प्रभावी ढंग से प्रवेश करने के लिए आहार वसा की जरूरत होती है। खाली पेट सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इसकी प्रभावशीलता 50% तक कम हो सकती है।

आप अपने सप्लीमेंट को एवोकैडो, नट्स, अंडे, घी या फुल-फैट दही जैसे खाद्य पदार्थों के साथ लें सकते हैं ताकि अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो सके। सप्लीमेंट को लेने के लिए सही समय का चुनाव करे तथा अपने सबसे भारी भोजन के बाद इसका सेवन करे। इससे शरीर को वह आवश्यक “फैट वातावरण” मिलता है जिससे विटामिन आसानी से बाइंड होकर अवशोषित हो सके।

“को-फैक्टर्स” की भूमिका: स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल विटामिन-डी अकेले काम नहीं करता है। इसके अलावा स्वास्थ्य खतरों से बचने के लिए विटामिन K2 और मैग्निशियम तत्व अति आवश्यक हैं। एक ओर जहाँ विटामिन-डी कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है, वहीं विटामिन K2 कैल्सियम को धमनियों या किडनी में जमा होने के बजाय हड्डियों तक पहुंचने में मदद करता है। जिसके वजह से हृदय रोग या किडनी स्टोन का खतरा कम होता है। वही दुसरी ओर मैग्निशियम एक प्रकार का खनिज है जो शरीर में विटामिन-डी को सक्रिय करने के लिए एक महत्वपूर्ण को-फैक्टर है। आप अपने आहार में पालक, बादाम और कद्दू के बीज जैसे मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते है।

क्यों हैं महत्वपूर्ण ?

भारत में प्रचूर मात्रा में धूप होने के बावजूद भी विटामिन-डी की कमी एक “मूक महामारी” बनी हुई है। इसके निम्न स्तर से न सिर्फ हड्डियां कमजोर होे रही है, बल्कि कमजोर इम्यूनिटी के साथ-साथ डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य भी बिगड़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार उच्च खुराक वाले सप्लीमेंट शुरू करने से पहले 25(OH)D (25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी) ब्लड टेस्ट के जरिए अपने स्तर की जांच जरूर कराएं, क्योंकि विटामिन-डी की अत्यधिक मात्रा शरीर के लिए ज़हरीली भी हो सकती है।

रिपोर्ट : सुशील कुमार साह

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