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दिनभर ऑफिस में एक ही जगह बैठना पड़ सकता है भारी, हो सकती है सर्वाइकल की बीमारी

By Harsh 
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सेहत।  अगर आप भी रोजाना 8 से 10 घंटे कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने गलत पोश्चर और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण सर्वाइकल से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लंबे समय तक गर्दन झुकाकर लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करने से गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे दर्द और अकड़न की शिकायत हो सकती है।

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सर्वाइकल के कारण, लक्षण और इसके उपाय

हमारी गर्दन को सहारा देने वाली रीढ़ के ऊपरी हिस्से को सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है। यह संरचना सिर का भार संभालने के साथ-साथ गर्दन को अलग-अलग दिशाओं में आसानी से घुमाने में मदद करती है। सर्वाइकल स्पाइन सात छोटी-छोटी हड्डियों (वर्टिब्रा) से मिलकर बनी होती है, जिनके बीच मौजूद डिस्क झटकों को सहने और हड्डियों के बीच संतुलन बनाए रखने का काम करती हैं। जब लंबे समय तक गलत पोश्चर, लगातार बैठे रहने या अन्य कारणों से इन हड्डियों, डिस्क या आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है तो गर्दन में दर्द, अकड़न, खिंचाव और कभी-कभी कंधों या हाथों तक दर्द फैलने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

आम बोलचाल में इसी स्थिति को सर्वाइकल की समस्या कहा जाता है।सर्वाइकल समस्या के शुरुआती लक्षणों में गर्दन में दर्द, कंधों में जकड़न, सिरदर्द, हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन और गर्दन घुमाने में परेशानी शामिल हो सकती है। यदि इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या गंभीर रूप ले सकती है और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

इससे बचने के लिए विशेषज्ञ सही बैठने की मुद्रा अपनाने की सलाह देते हैं। कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें, कुर्सी ऐसी हो जो पीठ को पर्याप्त सहारा दे और हर 30 से 45 मिनट के बाद कुछ मिनट के लिए उठकर चलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें। नियमित व्यायाम, गर्दन और कंधों की एक्सरसाइज तथा संतुलित जीवनशैली भी सर्वाइकल समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

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यदि गर्दन का दर्द लगातार बना रहे, हाथों में कमजोरी महसूस हो या दर्द बढ़ता जाए, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान और सही देखभाल से सर्वाइकल से जुड़ी कई समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ पोश्चर और नियमित गतिविधि अपनाकर आप अपनी गर्दन और रीढ़ की सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकते हैं।

रिपोर्ट: कल्पना पाण्डे

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