छठ पूजा का पावन पर्व देशभर में मनाया जा रहा है। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. छठ पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इसमें पहले दिन नहाय-खात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन षष्ठी को शाम में डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन सप्तमी को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
Chhath Puja Special Kosi Bharna 2021: छठ पूजा(Chhath Puja) का पावन पर्व देशभर में मनाया जा रहा है। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. छठ पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इसमें पहले दिन नहाय-खात, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन षष्ठी को शाम में डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन सप्तमी को सुबह उगते सूर्य(Sun Worship) को अर्घ्य दिया जाता है। इस पर्व को बिहार, झारखंड और यूपी के लोग मुख्य रूप से मनाते हैं। इस खबर में आप पढ़ेगे छठ पूजा में होने वाली एक विशेष प्रक्रिया के बारे में। आखिर क्यों भरी जाती है कोसी और इसके क्या महत्व हैं ये आप यहां जान सकते हैं।
कोसी भरने की प्रकिया
कोसी भरने के दौरान पूजा में एक मिट्टी की बनी हाथी होती है। जिसे सबसे पहले मिट्टी के हाथी को सिंदूर लगाया जाता है। फिर घड़े में फल, ठेकुआ, अदरक, सुथनी व अन्य सामग्री रखी जाती है। इसके बाद कोसी के चारों तरफ दीये जलाए जाते हैं। उसके बाद अर्घ्य की सामग्री से भरा सूप, डलिया, मिट्टी के ढक्कन व तांबे को बर्तन को रखकर दीये जलाए जाते हैं। कोसी भरने के दौरान पांच से छ: गन्ने का भी उपयोग किया जाता है। सभी गन्नों को आपस में जोड़ कर के एक साथ खड़ा किया जाता है। इन गन्नों के बीच में ही अन्य पूजा सामग्री को रखते हैं। फिर अग्नि में धूप डालकर हवन किया जाता है और छठी मैया की पूजा-अर्चना कर माथा टेका जाता है। उसके बाद यही प्रक्रिया सप्तमी की सुबह सूर्य को अर्ग्घ देते समय दोहराई जाती है। इस दौरान महिलाएं घाट पर छठ मैया(chhath puja) के गीत गाती हैं।