नई दिल्ली। जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में चल रहे प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता विजेता दहिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी को बड़ा कदम उठाना पड़ा। विवाद बढ़ने पर CJP ने दहिया को तत्काल प्रभाव से प्रवक्ता पद से हटा दिया और उनकी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां वापस ले लीं।
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We strongly condemn the deeply insensitive actions of our spokesperson Vijeta Dahiya, whose videos surfaced while peaceful protestors and our team were facing brutal police violence. Such conduct is unacceptable, shows a complete lack of judgment, and is wholly inconsistent with…
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 21, 2026
बर्गर खाने पर पूछे गए सवाल से शुरू हुआ विवाद
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वायरल वीडियो में विजेता दहिया से आंदोलन के दौरान बर्गर खाने को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि बर्गर खाना उनका निजी फैसला है और इसके लिए वह किसी को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी इच्छा से देश के लिए काम कर रहे हैं, किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और इस तरह के सवालों को उन्होंने बेवजह की बहस बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ आलोचकों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया पर मिली तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर दहिया की आलोचना शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि जब आंदोलन से जुड़े लोग लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं, तब इस तरह का बयान आंदोलन की गंभीरता को कम करता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे समर्थकों की भावनाओं की अनदेखी बताया।
पार्टी ने बयान जारी कर जताई नाराजगी
विवाद बढ़ने पर CJP ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि पार्टी विजेता दहिया के व्यवहार की कड़ी निंदा करती है। पार्टी के मुताबिक, जिस समय संगठन के कार्यकर्ता और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी मुश्किल हालात का सामना कर रहे थे, उस दौरान सामने आया वीडियो बेहद असंवेदनशील था।
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आंदोलन के सिद्धांतों के खिलाफ था व्यवहार
CJP ने अपने बयान में कहा कि संगठन अनुशासन और जवाबदेही में विश्वास रखता है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि दहिया का आचरण आंदोलन के मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था। इसी कारण उन्हें प्रवक्ता पद से हटाने के साथ-साथ सभी आधिकारिक दायित्वों से भी मुक्त कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष पार्टी के फैसले को सही बता रहा है, जबकि कुछ लोग इसे बढ़ते जनदबाव के बाद उठाया गया कदम मान रहे हैं।
Am sorry but this is staggering arrogance.
Students gathered in large numbers because you asked them to march to Parliament. You cannot demand accountability from the government while brazenly evading your own. Accountability isn’t selective. pic.twitter.com/27x1XMv8g7— Rohini Singh (@rohini_sgh) July 21, 2026