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सीएम योगी के तेवर से यूपी में दंगों पर लगा फुल स्टॉप, इसकी गवाही देते हैं NCRB के ये आंकड़े

यूपी (UP) के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपराध को लेकर बेहद सख्त माने जाते हैं। योगी सत्ता में आने के बाद वह अपराधियों को कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं। उनकी बातों का अपराधियों में खौफ साफ दिख रहा है। ऐसा हम नहीं NCRB के आंकड़ों से साबित भी होता है।

By संतोष सिंह 
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लखनऊ। यूपी (UP) के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) अपराध को लेकर बेहद सख्त माने जाते हैं। योगी सत्ता में आने के बाद वह अपराधियों को कई बार चेतावनी भी दे चुके हैं। उनकी बातों का अपराधियों में खौफ साफ दिख रहा है। ऐसा हम नहीं NCRB के आंकड़ों से साबित भी होता है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में साल 2022 में एक भी दंगा नहीं हुआ। जबकि पिछले 5 साल में अपराध की घटनाओं में 50 प्रतिशत की गिरावट आई है।

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NCRB ने 2022 के लिए जो आंकड़ा जारी किया है, उसके मुताबिक पिछले 5 साल में असम में भी दंगों में गिरावट आई है। यहां पर 80 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, छत्तीसगढ़ में ये आंकड़ा बढ़ गया है। यहां पर 44 प्रतिशत का उछाल आया है। देशभर में, सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं में 2018 और 2022 के बीच 34 फीसदी की गिरावट देखी गई है।

सांप्रदायिक दंगे 2021 में 378 से घटकर 2022 में केवल 272 रह गए। मध्य प्रदेश में 2022 में सांप्रदायिक या धार्मिक दंगों की 68 घटनाएं हुईं, बिहार में 60 प्रतिशत और झारखंड में 46 प्रतिशत। एनसीआरबी (NCRB) के ‘भारत में अपराध – 2022’ के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक या धार्मिक दंगों की एक भी घटना नहीं हुई है।

इस राज्य में हुए सबसे ज्यादा दंगे

पिछले साल देश में सबसे ज्यादा राजनीतिक दंगे केरल में हुए। जहां ऐसी 301 घटनाएं हुईं। ओडिशा में 224 और महाराष्ट्र में 86 दंगे हुए। 2018 और 2022 के बीच एनसीआरबी (NCRB)  अपराध डेटा की राज्यवार तुलना से पता चलता है कि जहां देश में हत्या के मामलों में गिरावट देखी गई, वहीं राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दर्ज हत्याओं में क्रमशः 21.6 प्रतिशत और 10.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में हत्या के मामलों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई।

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पिछले 5 वर्षों में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि राजस्थान (61.7 प्रतिशत ) और तमिलनाडु (58.1 प्रतिशत) में हुई, जबकि असम में ऐसे मामलों में लगभग 50 प्रतिशत की कमी देखी गई। जबकि 2018 और 2022 के बीच पूरे भारत में बलात्कार के मामलों में 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई, असम और मध्य प्रदेश में गिरावट की दर कहीं अधिक थी। इस अवधि के दौरान असम में दर्ज बलात्कार के मामलों में 32.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 44.2 प्रतिशत की गिरावट आई। दूसरी ओर, बिहार में जघन्य बलात्कार के मामलों में 35.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि तेलंगाना और राजस्थान में क्रमशः 34.3 प्रतिशत और 24.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

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