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Election Freebies : सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी खैरात को माना गंभीर मुद्दा, कहा- इससे डूब रही है देश की अर्थव्यवस्था

रेवड़ी कल्चर को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से सख्त टिप्पणी की है। चुनावों के वक्त मुफ्त में चीजें देने के राजनीतिक दलों के वादों और मुफ्त बिजली व पानी वितरण (Freebies) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने गंभीर मुद्दा माना है। शीर्ष कोर्ट के दो जजों की पीठ ने आज करीब 20 मिनट तक इसे चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। रेवड़ी कल्चर को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से सख्त टिप्पणी की है। चुनावों के वक्त मुफ्त में चीजें देने के राजनीतिक दलों के वादों और मुफ्त बिजली व पानी वितरण (Freebies) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने गंभीर मुद्दा माना है। शीर्ष कोर्ट के दो जजों की पीठ ने आज करीब 20 मिनट तक इसे चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका में चुनावी खैरात पर पाबंदी की मांग करते हुए इस पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है।

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शीर्ष अदालत ने वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर के दौरान ये टिप्पणी की। याचिका में चुनावों के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए ‘मुफ्त’ का वादा करने वाले राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। याचिका में चुनाव घोषणापत्र को विनियमित करने के साथ-साथ उसमें किए गए वादों के लिए राजनीतिक दलों को जवाबदेह ठहराने के लिए कदम उठाने को कहा गया है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि कोई यह नहीं कह रहा है कि यह मुद्दा नहीं है। यह एक गंभीर मुद्दा है। जिसे मिल रहा है वे चाहते हैं कि मिलता रहे, हम एक कल्याणकारी राज्य हैं। कुछ लोग कह सकते हैं कि वे टैक्स देते हैं और इसका इस्तेमाल विकास प्रक्रिया के लिए किया जाना चाहिए है। इसलिए यह एक गंभीर मुद्दा है। इसलिए दोनों पक्षों को समिति द्वारा सुना जाना है।”

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की आगे सुनवाई की, लेकिन साफ कहा कि वह आज फैसला नहीं सुनाएगी। सभी पक्षों के सुझावों पर विचार करेगी, इसके बाद ही फैसला दिया जाएगा। मामले में 17 अगस्त को आगे सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने कहा कि दलों द्वारा मुफ्त में चीजें व सेवाएं देने का वादा करना और वितरित करना गंभीर मसला है। यह पैसा बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाना चाहिए। पैसे गंवाना और लोगों की भलाई के कामों में संतुलन होना चाहिए। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से अपने सुझाव देने को कहा।

मुख्य न्यायधीश ने यह भी कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां “गरीबी मौजूद है ।  केंद्र सरकार की भी भूखे लोगों का पेट भरने की योजना है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था पैसे खो रही है इसलिए “लोगों के कल्याण को संतुलित करना होगा।

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गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश एन वी रमना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी व न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने तीन अगस्त को केंद्र, नीति आयोग, वित्त आयोग और आरबीआई जैसे हितधारकों से मुफ्त चीजों के वादों के गंभीर विषय पर मंथन करने और इनसे निपटने के लिए सकारात्मक सुझाव देने को कहा था।

हालांकि इस दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अभी हम कोई आदेश नहीं दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले पर एक कमेटी बनाए। लोगों की भलाई के लाई जाने वाली वेलफेयर स्कीम और देश की आर्थिक सेहत दोनों में संतुलन बनाये रखने की जरूरत है। इसलिए ही हम सब इस पर चर्चा कर रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

आप ने दी यह दलील
आम आदमी पार्टी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले में विशेषज्ञ समिति के गठन को गैर जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं और मुफ्त में चीजें देने में अंतर है।

रेवड़ी कल्चर को लेकर पीएम कर चुके हैं आगाह

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को रेवड़ी कल्चर के खिलाफ आगाह किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि यह देश के विकास के लिए खतरनाक हो सकती है। बुधवार को पीएम ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना यह भी कहा कि आत्मनिर्भर बनने के भारत के प्रयास में मुफ्त उपहार एक बाधा है और यह करदाताओं पर बोझ भी है।

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प्रधानमंत्री ने मुफ्त उपहार देने की राजनीति में शामिल होने को लेकर कुछ विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह की चीजें राष्ट्र को केवल नुकसान ही पहुंचाएंगी क्योंकि इससे नयी प्रौद्योगिकी में निवेश बाधित होता है। उन्होंने कहा कि कोई अगर स्वार्थ की राजनीति में लिप्त है तो वह मुफ्त पेट्रोल-डीजल का वादा भी कर सकता है।

मोदी ने कहा कि इस तरह के कदम हमारे बच्चों को उनके हक से वंचित करने और देश को आत्मनिर्भर बनने से रोकने के समान होंगे। इस तरह की स्वार्थी नीतियां देश के ईमानदार करदाताओं पर अधिक बोझ डालेंगी। उन्होंने कहा कि मुफ्त की सौगातें बांटने का वादा करने वालों को नयी प्रौद्योगिकियों में निवेश के लिए संसाधन कभी नहीं मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कोई सही नीति नहीं है, बल्कि भ्रामक है। यह राष्ट्रीय हित में नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के खिलाफ है। यह राष्ट्र निर्माण नहीं, बल्कि देश को पीछे धकेलने का प्रयास है।

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