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गुरु हो जाएंगे वक्री 20 जून 2021 से जो 120 दिन तक प्रभावित होगी जानिए किस राशि में कैसा फल देंगे

20 जून से बृहस्पति कुंभ राशि में वक्री गति से चलना शुरू कर देंगे और 120 दिन बाद यानी 18 अक्टूबर 2021 को पुन: मार्गी होंगे। गुरु हर 13 महीने में लगभग चार महीने के लिए वक्री हो जाते है।

By प्रीति कुमारी 
Updated Date

ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 20 जून 2021 को मनाया जाएगा। इसी दिन से बृहस्पति ग्रह लगभग 120 दिन तक वक्री चाल चलेंगे। इससे क्या होगा हमारे जीवन पर प्रभाव 20 जून से बृहस्पति कुंभ राशि में वक्री गति से चलना शुरू कर देंगे और 120 दिन बाद यानी 18 अक्टूबर 2021 को पुन: मार्गी होंगे। हालांकि बीच में कुछ काल के लिए वक्री अवस्था में ही 14 सितंबर को गुरु अर्थात बृहस्पति मकर राशि में गोचर करने लगेंगे और मार्गी भी इसी राशि में होंगे जहां पहले से ही शनि विराजमान हैं। फिर इसके कुछ समय बाद 21 नवंबर को गुरु फिर से कुंभ राशि में भ्रमण करने लगेंगे।

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वक्री गुरु का फल

गुरु किस भाव में वक्री हो रहा है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है। कि जातक पर इसका क्या प्रभाव होगा। जैसे चतुर्थ भावस्थ वक्री गुरु मनोबल बढ़ाने वाला होता है। जातक दूरदृष्टि से अपने कार्यों को उचित प्रकार से करने में सफल होता है। बृहस्पति की दृष्टि जिन भावों पर होती है। उस भाव से सम्बन्धित उत्तम फल की प्राप्ति होती है ।लेकिन जिस भाव में यह स्थित होता है ।उस भाव की हानि होती है। गुरु हर 13 महीने में लगभग चार महीने के लिए वक्री हो जाता है। इस दौरान जो बढ़ोतरी हो रही होती है। वह मध्‍यम पड़ जाती है। अत: हर राशि पर कुछ ना कुछ तो असर होता ही है। साथ ही धरती के मौसम और वातावरण में भी बदलाव देखने को मिलते हैं। गुरु ग्रह ज्ञान, विवेक, प्रसन्नता, भाग्य और हमारे सुख का कारक है। कुण्डली में गुरु का वक्री होना, अदभुत दैवी शक्ति प्रदान करता है। ऐसे में असंभव कार्यों को पूर्ण करते हुए यश और सम्मान की प्राप्ति होती है।

वक्री गुरु का राशियों पर असर

इन 5 राशि वालों को बड़ा लाभ मिलने के आसार रहेंगे। क्युकी गुरु ग्रह के कुंभ में वक्री होने, मकर में वक्री अवस्था में प्रवेश करने और वहीं मार्गी होने और वहां से निकलकर पुन: कुंभ में गोचर करने से इन 5 राशि को बड़ा लाभ मिलेगा वो राशि है। मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन।

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– वृषभ राशि में दसवें भाव में गोचर कर रहा है जो कर्म का भाव है। करियर, नाम और प्रसिद्धि को लेकर संघर्ष करना होगा। हालांकि कार्यक्षेत्र में लाभ होगा।

– कर्क राशि में अष्टम भाव में गोचर कर रहा है। संयुक्त उद्यम, कर, बीमा, ऋण और मृत्यु के आठवें घर में गोचर का फल देर से मिलेगा। आपको अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है।

– कन्या राशि में छठे भाव में वक्री गोचर कर रहा है। सेहत और दांपत्य जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा परंतु कार्यक्षेत्र में नहीं। फिर भी आपको ध्यान रखना होगा। बहुत कड़ी मेहनत करने की जरूरत होगी।

– गुरु मेष राशि में 11वें भाव में रहेंगे जो लाभ का भाव है। मेष राशि को करियर, नौकरी, प्रमोशन और व्यापार में लाभ होगा, लेकिन इस राशि वालों को निवेश या उधार लेने-देने से बचना चाहिए।

–  सिंह राशि के सप्तम भाव में वक्री गुरु रहेंगे, जो कि दांपत्य जीवन में परेशानी का कारण बन सकता है परंतु विवाह संबंधी मामले में सफलता मिलेगी और व्यापार में लाभ, संपत्ति में बढ़ोतरी की संभावना है। वृश्चिक को भी कार्यक्षेत्र में उन्नती के योग और यात्रा से लाभ होगा। धनु को भी व्यापार में लाभ और सुख सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। मीन को मिलेगा भाग्य का साथ। रुके हुए कार्य और रुका धन में प्रगति होगी।

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– गुरु कुंभ राशि में ही वक्री हो रहा है। गुरु के इस वक्री गोचर के दौरान आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। आपको धोखा खाने से बचना चाहिए। आप अपने अच्‍छे गुण से ही जीत हासिल कर सकते हैं।

– कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मिथुन पर ही गुरु के वक्री होने का प्रभाव पड़ेगा। इस राशि के नवम भाव में गुरु वक्री गोचर करेंगे। यह धर्म, अध्यात्म और भाग्य का भाव होता। ऐसे में धर्म की शरण में रहेंगे तो लाभ मिलेगा अन्यथा कड़ी मेहनत करना होगी। इसके अलावा पिता के साथ विवाद ना करें।

– तुला राशि के पंचम भाव में गुरु वक्री गोचर कर रहा है। पंचम भाव संतान, शिक्षा और करियर का मुख्य भाव है।

– दांपत्य जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। निवेश का जोखिम ना उठाएं।

– मकर राशि के द्वितीय भाव में गुरु वक्री गति करेगा। अनावश्यक खर्चे से बचें। जीवनशैली में बदलाव हो सकता है। वाणी पर संयम रखें और ससुराल पक्ष से विवाद ना करें।

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