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Hanuman Jayanti 2026 :  हनुमान जयंती कल , जानें संकटमोचन को चोला चढ़ाने की सही विधि

चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर बृहस्पतिवार को हनुमान जयंती पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Hanuman Jayanti 2026 : चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर बृहस्पतिवार को हनुमान जयंती पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व है। श्री हनुमान जयंती 2026 गुरुवार, 2 अप्रैल, 2026को मनाई जाएगी । इस दिन उनकी विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। महाबीर हनुमान भक्त उनकी कृपा पाने के लिए  हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, स्तुति, स्तोत्र और मंत्रों का पाठ करते है।  इसके अलावा व्रत, ध्यान आदि भी किया जाता है। इसी तरह हनुमान जी को चोला चढ़ाना भी उनकी पूजा का ही एक अहम हिस्सा है, जिसमें सिंदूर और अन्य सामग्री हनुमान को अर्पित की जाती हैं।

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हनुमान जयंती के दिन सबसे पहले हनुमान जी का गंगाजल से अभिषेक करें।
अभिषेक करने के बाद एक स्वच्छ वस्त्र से हनुमान जी की प्रतिमा को पोछें।
उसके बाद नारंगी सिंदूर, घी और चमेली के तेल को एकसाथ मिलाकर हनुमान जी के पूरे शरीर में लगाएं।
उसके बाद हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।
हनुमान जी को चोला चढ़ाने के दौरान मंत्रों का जाप जरूर करें।
सबसे पहले आप हनुमान जी के बाएं पांव में चोला चढ़ाएं।
चोला चढ़ाने के बाद हनुमान जी को इंत्र लगाएं।
हनुमान जी को इत्र लगाने के बाद चांदी या सोने की बनी कोई चीज भी चढ़ाएं।

हनुमान जी को जनेऊ पहनाएं।
हनुमान जी को जनेऊ पहनाने के हाथ् साफ वस्त्र पहनाएं।
उसके बाद हनुमान जी को भोग लगाएं।
भोग लगाने के बाद उनकी आरती करें।
हनुमान जी की आरती करने के बाद राम स्तुति जरूर गाएं। इससे हनुमान जी बेहद प्रसन्न होते हैं।

हनुमान जी को चोला चढ़ाने का मंत्र (Hanuman ji ko Chola chadhane ka mantra)

ऐसी मान्यता है कि बजरंगबली को चोला चढ़ाने से साधक की मानसिक और शारीरिक शक्ति में वृद्धि होती है। यह शनि और मंगल जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने में लाभकारी माना जाता है। हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करने से वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।

मंत्र
‘सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये।
भक्तयां दत्तं मया देव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम।।’

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