नई दिल्ली। उत्तराखंड में रामलीला मैदान का शुद्धिकरण करने पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने हल्द्वानी में हुई अपनी रैली का जिक्र करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। खड़गे ने कहा कि बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि मैंने हल्द्वानी में रैली की। मैंने किसी धर्म का नाम नहीं लिया, समाज का नाम नहीं लिया, बल्कि लोगों की समस्याओं को बताया।
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मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि हम पहले से कहते आ रहे हैं कि इस देश में दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। आखिर वहां ‘हवन’ की क्या ज़रूरत थी? रामलीला मैदान में हर पार्टी के लोग जनसभा करते हैं, लेकिन वहां जो किया गया, वह हिंदू धर्म के खिलाफ है। इससे यह भी साफ होता है कि BJP के लोग देश को बांटने और जातियों के बीच झगड़ा कराने का काम कर रहे हैं। यही BJP की कथनी और करनी में फर्क है। मैं इसकी निंदा करता हूं।
मैं इस बात को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं वर्षों से इस सदन का सदस्य हूं और निचले सदन में भी रहा।
मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मैं दलित हूं, मेरी रक्षा करो और न ही किसी के सामने गिड़गिड़ाया। मुझ में लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूं।
लेकिन हल्द्वानी में स्टेज का… pic.twitter.com/gvOanoG81i
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— Congress (@INCIndia) August 13, 2026
खड़गे ने आगे कहा कि उनके भाषण के बाद अगले दिन बीजेपी ने हवन कर उस मंच का शुद्धिकरण करने का काम किया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, कि ये कैसा लोकतंत्र है? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा कि वह इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते। मैं इस बात को कभी सदन में नहीं कहा। मैं अनुसूचित जाति से हूं, लेकिन कभी किसी से नहीं कहा कि मेरी रक्षा करो। उन्होंने कहा कि मैं कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाता नहीं हूं। मेरे अंदर लड़ने की शक्ति है और मैं लड़ता हूं। उन्होंने इसे अपना अपमान बताते हुए कहा,कि बीजेपी वाले ये शुद्धिकरण करके मेरा अपमान कर रहे हैं। खड़गे ने आगे कहा कि मेरी मांग है कि उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज करो और उन्हें गिरफ्तार करो।
मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने कहा कि संसद 19 दिन चली और गृहमंत्री अमित शाह के पास कम से कम 25-26 दिन थे, फिर भी उन्होंने इस बारे में नहीं सोचा। अमित शाह का बयान सिर्फ जनता में अपनी छवि बनाने के लिए है कि मैं जवाब देने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि वे कब तैयार हुए, जब उनका एजेंडा पूरा हो गया। सरकार ने 19 दिन बर्बाद कर दिए और अब वे सदन का समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं? ये शर्म की बात है।