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Nuclear Bomb : महाभारत में इस्तेमाल ‘ब्रह्मास्त्र’,’परमाणु बम’ जैसे था शक्तिशाली, वैज्ञानिकों को मिल चुके हैं रेडिएशन के सबूत

परमाणु बम (Nuclear Bomb) दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है। जापान (Japan) के हिरोशिमा और नागासाकी (Hiroshima and Nagasaki) में दुनिया ने इस बम की विनाशलीला देख चुकी है। अगर किसी देश पर परमाणु बम (Nuclear Bomb)  फेंक दिया जाए, तो लाखों की आबादी एक झटके में खत्म हो जाएगी।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। परमाणु बम (Nuclear Bomb) दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है। जापान (Japan) के हिरोशिमा और नागासाकी (Hiroshima and Nagasaki) में दुनिया ने इस बम की विनाशलीला देख चुकी है। अगर किसी देश पर परमाणु बम (Nuclear Bomb)  फेंक दिया जाए, तो लाखों की आबादी एक झटके में खत्म हो जाएगी।

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द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 को जापान (Japan) के हिरोशिमा शहर (Hiroshima City) पर परमाणु बम (Nuclear Bomb)  गिराया गया था। इसके तीन दिन बाद 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम (Nuclear Bomb)  से हमला किया था। इस परमाणु हमले (Nuclear Attack) के तुरंत बाद द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War)  खत्म हो गया। जापान (Japan) ने मित्र राष्ट्रों के सामने समर्पण कर दिया। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि महाभारत काल (Mahabharata Period) में भी ‘परमाणु बम’ (Nuclear Bomb)  का इस्तेमाल किया गया था। इस बात का सबूत वैज्ञानिकों को मिल चुका है।

वैज्ञानिक जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर (Scientist Julius Robert Oppenheimer) ने परमाणु बम (Nuclear Bomb)  का आविष्कार किया था। उन्होंने अपने एक शोध में इस बात खुलासा किया है कि महाभारत काल (Mahabharata Period) में परमाणु बम (Nuclear Bomb)  जैसे विनाशकारी हथियारों का इस्तेमाल किया जा चुका है। बता दें कि ओपेनहाइमर (Oppenheimer) ने गीता और महाभारत (Mahabharata) का गहराई से अध्ययन के बाद यह बात कही थी।

रॉबर्ट ओपेनहाइमर (Robert Oppenheimer) ने महाभारत (Mahabharata) में बताए गए ब्रह्मास्त्र की मारक क्षमता पर शोध किया था। उनके इस शोध मिशन का नाम ट्रिनिटी यानी त्रिदेव था। रॉबर्ट ओपेनहाइमर (Robert Oppenheimer) और अन्य वैज्ञानिकों की टीम ने ,साल 1939 से 1945 के बीच शोध किया था। इस शोध के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि महाभारत (Mahabharata)  में जिस ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया गया था, वो वर्तमान समय के परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) के समान ही शक्तिशाली था।

पुणे के एक डॉक्टर व लेखक पद्माकर विष्णु वर्तक (Padmakar Vishnu Vartak) ने भी अपनी शोध में माना है कि महाभारत काल (Mahabharata Period) में इस्तेमाल किया गया ब्रह्मास्त्र परमाणु बम (Nuclear Bomb) के समान ही था। डॉ. वर्तक ने अपनी किताब ‘स्वयंभू’, में इस बात का जिक्र किया है। रामायण और महाभारत काल (Mahabharata Period)  में ब्रह्मास्त्र को सबसे खतरनाक हथियार माना जाता था। उस काल में कई योद्धाओं के पास ब्रह्मास्त्र थे। बताया जाता है कि जो व्यक्ति ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करता था, उसके पास क्षमता होती था कि वह इसे वापस भी ले सकता था। लेकिन आचार्य द्रोणाचार्य (Acharya Dronacharya) के पुत्र अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र कैसे वापस लेना है? यह तरीका याद नहीं था। इसकी वजह से ब्रह्मास्त्र के छूटने के बाद भयानक तबाही मची थी।

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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) पर कई शोध किए गए हैं। शोध के मुताबिक, हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो में कई नर कंकाल मिले हैं, जिनसे जानकारी मिलती है कि उन्हें किसी भयंकर अस्त्र से मारा गया था। इसके साथ ही यहां पर कई ऐसे प्रमाण भी मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि किसी काल में यहां अत्यधिक मात्रा में रेडिएशन (Radiation) उत्पन्न हुआ था,जितना किसी परमाणु बम (Nuclear Bomb)  के विस्फोट के बाद होता है।

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