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PK बने अबूझ पहेली : टीवी ,अखबार व लैपटॉप वर्षों से नहीं खोला,अब 2024 में है अग्नि परीक्षा

राजनीतिज्ञ और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर देश के लिए एक अबूझ पहेली बन चुके हैं। पीके ने बिहार के रोहतास जिले से निकलकर बक्सर में पढ़ाई और फिर हैदराबाद से इंजीनियरिंग करने वाले प्रशांत यूनाइटेड नेशन के एक हेल्थ प्रोग्राम में काम किया। इसके यूनाइटेट नेशन यूएन के लिए ही बिहार में काम किए। फिर अमेरिका चले गए। इसके बाद कैरियर ने जो उड़ान भरी वह आज तक अनवरत जारी है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। राजनीतिज्ञ और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) देश के लिए एक अबूझ पहेली बन चुके हैं। पीके ने बिहार के रोहतास जिले से निकलकर बक्सर में पढ़ाई और फिर हैदराबाद से इंजीनियरिंग करने वाले प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) यूनाइटेड नेशन (United Nation) के एक हेल्थ प्रोग्राम में काम किया। इसके यूनाइटेट नेशन (UN) के लिए ही बिहार में काम किए। फिर अमेरिका चले गए। इसके बाद कैरियर ने जो उड़ान भरी वह आज तक अनवरत जारी है।

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इसी बीच प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  उर्फ पीके के एक बार फिर से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से बैठक के बाद पार्टी शामिल होने की खबरें तेज हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता और प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) गुजरात विधानसभा चुनाव और साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) के लिए कांग्रेस पार्टी (Congress Party) को रोडमैप तैयार कर प्रजेंटेशन दिया है। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर जल्द कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा कि बचपन में मेरे पिताजी ने लोगों में खूबी देखने की मुझे एक चीज सिखाई थी। वह कहते थे कि अगर किसी आदमी ने कुछ भी हासिल किया है तो उसमें कोई न कोई खूबी ज़रूर होगी। जब आप उससे मिलें तो देखें कि उसकी क्या खूबी है? पिता की उसी बात को गांठ बांध साल 2011 में नरेंद्र मोदी के साथ काम करने की शुरुआत करने वाले प्रशांत किशोर पिछले एक दशक में बिहार में नीतीश कुमार, यूपी कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में वाईएस जगनमोहन रेड्डी, तमिलनाडु में स्टालिन, पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ काम कर चुके हैं।

बता दें कि करीब एक दशक से देश की राजनीति के प्रचार तंत्र को पूरी तरह से बदलने वाले पीके पार्टियों के लिए तो रणनीति बनाते हैं, लेकिन वह खुद के लिए भी एक अलग ही रणनीति बनाकर चलते हुए दिखाई देते हैं। जिस वजह से वह अबूझ पहेली बन चुके हैं। वह शख्स जिसने सोशल मीडिया को भारतीय राजनीति का एक मजबूत प्रचार तंत्र बना दिया हो, उसने ट्विटर पर 18 अप्रैल 2022 तक सिर्फ 52 ट्वीट किए हैं। प्रशांत किशोर के बारे में कहा जाता है कि वह जिस भी नेता और पार्टी के लिए काम शुरू करते हैं, उसे संचार के हर माध्यम में एक मजबूत स्पेस दिलाने में कामयाब हो जाते हैं।

यही वजह है कि बदले दौर में पार्टियां नेताओं के फॉलोवर्स देखकर टिकट तक देने लगी हैं। लेकिन, वह शख्स तमाम इंटरव्यू में अपने बारे में कहता है कि वह न तो टीवी देखता है। न अखबार पढ़ता है। लैपटॉप खोले भी वर्षों हो गए हैं। सिर्फ और सिर्फ मोबाइल से काम करता है। यही आदतें उसको अबूझ पहेली बना दिया है।इसकी कुछ और भी वजहें हैं।

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साल 2021 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में जीते के बाद प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  ने कहा था कि मैं पोल स्ट्रेटजिस्ट के अपने काम को छोड़ रहा हूं। मैं जो भी कर रहा हूं, उसे आगे नहीं करना चाहता हूं। मैंने पर्याप्त कर लिया है। अब में कुछ समय के लिए ब्रेक लूंगा और फिर आगे जीवन में क्या करना है? उसके बारे में सोचूंगा। प्रशांत किशोर ने कहा था कि मैं इस स्पेस से निकलना चाहता हूं, लेकिन अब ऐसी खबरें हैं कि वह कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैंप्रशांत किशोर ने कहा था कि

हाल ही में प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  ने कांग्रेस को सुझाव दिया है कि वह यूपी, बिहार और ओडिशा में अकेले उतरे। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में गठबंधन करे। उन्होंने एक प्रेजेंटेशन में पार्टी की मजबूती और कमजोरी दोनों के तरफ इशारा किया और ये भी बताया कि किस तरह से इसे बेहतर किया जा सकता है।

बता दें कि प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  दिसंबर 2011 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के संपर्क में आए। ऐसा कहा जाता है कि कुछ ही महीनों में वह उनके सबसे विश्वासपात्र रणनीतिकार बन गए थे। वह मुख्यमंत्री के दफ्तर से दूर रहकर ही काम करते थे। सीधे मोदी को रिपोर्ट करते थे। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ कैंपेन की शुरुआत के पीछे भी प्रशांत को ही माना जाता है। इसके बाद नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) तीसरी बार गुजरात के सीएम बन जाते हैं।

इसी दौरान प्रशांत किशोर (Prashant Kishor)  एसोसिएशन ऑफ सिटीजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) गठन किया। इसने साल 2014 में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। यंग प्रोफेशनल्स मोदी कैंपेन की बागडोर संभाली और डेटा निकालना, रिसर्च करना, सोशल मीडिया पोल्स तैयार करना, फिर कैंपेन मैनेजमेंट करना। सारा काम इस टीम ने किया। चाय पे चर्चा, मोदी आने वाला है, रन फॉर यूनिटी, 3डी कैंपेन इसी टीम ने डिजाइन किया था।

हालांकि, साल 2014 के चुनाव के बाद प्रशांत किशोर(Prashant Kishor) बीजेपी से अलग हो गए और बिहार में नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए। वह CAG को स्पेशियलिस्ट पॉलिसी आउटफिट, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) में बदल दिए। प्रशांत ने इस चुनाव में भी महागठबंधन बनाया और जेडीयू-आरजेडी को साथ लाने में कामयाब ही नहीं हुए, उन्हें जीत भी दिलाई। नीतीश ने इसके बाद उन्हें अपना सलाहकार तक बना लिया था। हालांकि, बाद में वह उनसे भी अलग हो गए।

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साल 2017 पंजाब विधानसभा चुनाव में कैप्टन को बनाया सरदार

साल 2017 में प्रशांत किशोर ने पंजाब कांग्रेस के लिए काम किया। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें जिम्मेदारी दी । पीके इसमें सफल हुए। कैप्टन ने इस जीत के लिए पीके के काम की सराहना की थी।

साल 2017 यूपी चुनाव में कांग्रेस ने पीके के मुताबिक काम नहीं किया और हार गई
इस चुनाव में यूपी कांग्रेस ने पीके की सेवा ली। शीला दीक्षित को सीएम फेस बनाया गया। खाट पंचायत बुलाई गई। पूर्वी यूपी से एक यात्रा निकली, लेकिन पीके के मुताबिक वैसा काम नहीं किया और कांग्रेस जीत नहीं पाई।

साल 2019 आंध्र प्रदेश चुनाव में जगन को 151 सीट पर जीत मिली
इस चुनाव में पीके वाईएस जगनमोहन रेड्डी के लिए काम किए। इसमें प्रजा संकल्प यात्रा, समर शंखरवम जैसे कैंपेन हिट हुए और जगनमोहन ये चुनाव जीतने में कामयाब हुए। 175 सीट में से जगन को 151 सीट पर जीत मिली थी।

2020 दिल्ली चुनाव में आप को 70 में से 62 सीट मिली
इस चुनाव में प्रशांत किशोर ने आम आदमी पार्टी के लिए काम किया। इसमें आप की जीत हुई। उसे 70 में से 62 सीट मिली।

2021 पश्चिम बंगाल और तमिल नाडु चुनाव में बड़ी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में ममता और स्टालिन ने प्रशांत की सेवाएं ली और प्रशांत ने दोनों को बड़ी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये दोनों चुनाव काफी महत्वपूर्ण थे और प्रशांत इसमें सफल रहे।

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