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महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, बोलीं- कल लोकतंत्र की हुई एक बड़ी जीत, पुराने बिल को हमारा पूरा समर्थन

By Abhimanyu 
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Priyanka Gandhi’s Press Conference : केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन (131वां संशोधन) बिल पास न होने पर देश की सियासत गरमा गयी है। भाजपा और उसके सहयोगी विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने शनिवार को महिला आरक्षण पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने लोकसभा में बिल न पास होने को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। इसके साथ उन्होंने पुराने महिला आरक्षण बिल को लागू करने की मांग की।

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कांग्रेस महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “कल जो हुआ, वह लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ी जीत थी। संघीय ढांचे को बदलने और लोकतंत्र को कमज़ोर करने की सरकार की साज़िश नाकाम हो गई और उसे रोक दिया गया। यह संविधान की जीत थी, देश की जीत थी, और विपक्ष की एकता की जीत थी; और यह बात सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के चेहरों पर साफ़ दिखाई दे रही थी… मुझे लगता है कि यह एक साज़िश है, ताकि वे किसी भी तरह सत्ता में बने रह सकें… इसलिए, इसे हासिल करने के लिए, वे यह योजना बना रहे हैं कि महिलाओं का इस्तेमाल करके वे हमेशा के लिए सत्ता में कैसे बने रहें… उन्हें लगा था कि अगर यह बिल पास हो गया, तो वे जीत जाएंगे। और अगर यह पास नहीं हुआ, तो वे दूसरी पार्टियों को ‘महिला-विरोधी’ बताकर खुद को महिलाओं का ‘रक्षक’ साबित कर देंगे… हम जानते हैं कि महिलाओं का रक्षक बनना इतना आसान नहीं होता…”

उन्होंने कहा, “ये महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है।”

प्रियंका गांधी ने आगे कहा, “उनके (केंद्र के) लिए यह एक ‘काला दिन’ है, क्योंकि उन्हें पहली बार एक ज़ोरदार झटका लगा है—जिसके वे हकदार थे। आज महिलाओं की मुश्किलें तेज़ी से बढ़ रही हैं। उनका संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। महिलाएं बेवकूफ़ नहीं हैं। वे सब कुछ देख रही हैं। अब वह PR और मीडिया का शोर-शराबा काम नहीं आने वाला। अगर आप सचमुच कुछ ठोस करना चाहते हैं, तो उस बिल को वापस लाएं जो 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था और जिसे सभी पार्टियों का समर्थन मिला था। अगर उसे अभी लागू करने के लिए उसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव करने की ज़रूरत है, तो वे बदलाव करें और उसे अभी लागू करें। महिलाओं को उनके अधिकार दें—अभी इसी वक़्त। लेकिन, बातों को तोड़-मरोड़कर या उन्हें दूसरी चीज़ों से जोड़कर महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश न करें। इसे अभी करें। हम सब इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं…”

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