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जंतर-मंतर बवाल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी नसीहत- ‘लाठी-गोली नहीं, युवाओं को काउंसलिंग की जरूरत’

By Sushil Sah 
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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले के खिलाफ हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश ‘सूर्यकांत’ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन साथ ही सामाजिक तनाव को नियंत्रण करने के लिए प्रशासन को बेहद संवेदनशील रुख अपनाना होगा।

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योगी सरकार के रुख पर हुई बहस

इस अहम सुनवाई के दौरान जब प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों और राज्यों की कड़ी कार्रवाई पर चर्चा चल रही थी, तब अदालती दलीलों में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का नाम लिया गया। वकीलों की बहस के बीच यह सवाल उठाया गया कि क्या आंदोलनकारियों के आगे “योगी सरकार भी झुकेगी?” इस पर टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस ‘सूर्यकांत’ ने सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को आक्रामक रवैया छोड़ने तथा संयम बरतने की बड़ी हिदायत दी।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही आंदोलन में कुछ असमाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी की हो, लेकिन सरकार की तरफ से कोई भी आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और भड़का सकता है। युवाओं को शांत करने के लिए सही सलाह और काउंसलिंग की जरूरत है। इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकारों को यह राहत दी है कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों और नाबालिगों पर दर्ज मुकदमों को वापस ले सकती हैं। इस मामले में केंद्र सरकार ने भी अदालत को आश्वस्त किया है कि वह निर्दोष छात्रों पर कार्रवाई नहीं करेगी।

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अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है या जो गंभीर हिंसा में शामिल थे, उनके खिलाफ दर्ज FIR और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों तरफ से हुई कथित ज्यादतियों की जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी के गठन का निर्देश दिया है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर भी चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य जनहित याचिका का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि जंतर-मंतर अब बड़े प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त जगह नहीं रह गया है। वहां की संकीर्ण रास्तों के कारण वहां आपातकालीन सेवाएं और एंबुलेंस प्रभावित होती हैं। चीफ जस्टिस ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सॉलिसिटर जनरल ‘तुषार मेहता’ से कहा कि वे केंद्र सरकार से निर्देश लें कि क्या विरोध प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान जैसी किसी अन्य सुरक्षित और बड़ी वैकल्पिक जगह को तय किया जा सकता है? अदालत ने फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन सभी पक्षों से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को की जाएगी।

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