लखनऊ। हम अपने दैनिक जीवन में मिठास घोलने के लिए जिस सफेद चीनी (Sugar) का इस्तेमाल करते हैं, क्या आप जानते हैं कि वह असल में एक धीमा जहर है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर अब खुलकर चीनी को ‘मीठा जहर’ (Sweet Poison) कहने लगे हैं।
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बचपन से ही बच्चों के खान-पान में चीनी (Sugar) शामिल कर देना उनके आने वाले भविष्य और सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) और बाल रोग विशेषज्ञों की गाइडलाइंस के अनुसार, 2 साल तक के बच्चों को किसी भी रूप में ऊपर से चीनी (Added Sugar) नहीं देनी चाहिए।
दो साल से छोटे बच्चों के लिए क्यों खतरनाक है चीनी?
छोटे बच्चों का शरीर और उनका पाचन तंत्र इस उम्र में विकसित हो रहा होता है। इस नाजुक दौर में चीनी देने से उनके शरीर पर कई गंभीर नुकसान होते हैं।
स्वाद की खराब आदत पढ़ना: दो साल से कम उम्र में बच्चों के स्वाद का विकास होता है। अगर उन्हें शुरुआत में ही मीठे का स्वाद लग जाए, तो वे सादा और पौष्टिक खाना (जैसे दाल, सब्जी, दलिया और खिचड़ी) खाने से कतराने लगते हैं।
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दांतों में कैविटी और सड़न: बच्चों के छोटे दांतों में चीनी (Sugar) बहुत जल्दी चिपक जाती है। इससे उनके मसूड़ों में इन्फेक्शन और दांतों में कीड़े लगने की समस्या शुरू हो जाती है।
बचपन में ही मोटापा: चीनी (Sugar) में केवल ‘खाली कैलोरी’ (Empty Calories) होती है, यानी इसमें कोई भी विटामिन या मिनरल नहीं होता। इससे बच्चे का वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है।
कमजोर इम्युनिटी: अत्यधिक चीनी (Sugar) का सेवन करने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है, जिससे वे जल्दी-जल्दी सर्दी, खांसी और अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
विशेषज्ञों की राय: बाल रोग डॉक्टरों का मानना है कि जब हम छोटे बच्चों को रिफाइंड चीनी देते हैं, तो उनके दिमाग को इसकी लत (Sugar Addiction) लग जाती है। आगे चलकर ऐसे बच्चों में चिड़चिड़ापन और हाइपरएक्टिविटी ज्यादा देखी जाती है।
बड़ों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा
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चीनी (Sugar) केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़ों के लिए भी उतनी ही नुकसानदायक है। रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा चीनी खाने से शरीर को कई बीमारियां घेर लेती हैं। डायबिटीज (टाइप-2)जैसी गंम्भीर बीमारी हो सकती चीनी का अधिक सेवन शरीर में इंसुलिन के संतुलन को बिगाड़ देता है।
दिल की बीमारियां: रिफाइंड चीनी से खून में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लािसराइड्स बढ़ते हैं, जो हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देते हैं।
फैटी लिवर: चीनी को पचाने में लिवर को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे लिवर पर फैट जमा होने लगता है।
बच्चों को दो साल के बाद ही मिठास से परिचित कराएं, और उसके लिए भी प्रोसेस्ड चीनी के बजाय प्राकृतिक विकल्पों का चुनाव करें।
ताजे और मीठे फल (जैसे केला, चीकू, सेब) खजूर की प्यूरी सीमित मात्रा में गुड़ या धागे वाली मिश्री चीनी देखने में जितनी सफेद और खाने में जितनी मीठी लगती है, शरीर के अंदर जाकर यह उतनी ही कड़वी सच्चाई पेश करती है। अगर आप अपने बच्चों को एक स्वस्थ और बीमारी-मुक्त जीवन देना चाहते हैं, तो आज ही उनके भोजन से चीनी को पूरी तरह बाहर निकालें। थोड़ी सी समझदारी आपके बच्चे को जीवनभर की गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।
रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा