देश में बढ़ते मोटापे और खासकर बच्चों में बढ़ती जंक फूड की खपत को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से पैकेज्ड फूड पर आगे और पीछे दोनों तरफ Warning Labels को लेकर जल्द फैसला लेने को कहा है, ताकि लोगों को ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी आसानी से मिल सके।
नई दिल्ली। देश में बढ़ते मोटापे और खासकर बच्चों में बढ़ती जंक फूड की खपत को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से पैकेज्ड फूड पर आगे और पीछे दोनों तरफ Warning Labels को लेकर जल्द फैसला लेने को कहा है, ताकि लोगों को ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी आसानी से मिल सके।
बच्चों और बड़ों में मोटापे की समस्या पिछले 20 साल में पांच गुना तक बढ़ गई है, सन 2000 से 2022 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर 2 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गई है। इस बाबत दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि लोगों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता है। केंद्र को जंक फूड के पैकेट पर सामने की ओर ही चेतावनी लेबल लगाने के अपने आदेश को लागू करना होगा। इस बाबत कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।
कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र इसे स्वयं करता है, तो अच्छी बात है, नहीं तो हम आगे के लिए निर्देश जारी करेंगे। हमें केंद्र की वो दलीलें मंजूर नहीं हैं जिनमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानकों के बराबर होना संभव नहीं है। इस दलील के मुताबिक तो क्या भारत को एक अविकसित देश बने रहना चाहिए? जस्टिस जे बी पारदीवाला ने कहा कि यही वह प्रश्न है जिसे हम केंद्र के विचारार्थ रख रहे हैं। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपने आदेश में खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार से जोड़ा है।
जंक फूड खाने से बिगड़ रही लोगों की सेहत
यह आदेश गैर सरकारी संगठन ‘3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी’ द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में आया है। याचिकाकर्ता के वकील राजीव शंकर द्विवेदी ने अपनी दलीलों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशों को कई साल बीत गए हैं। इतने समय में सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया जबकि जंक फूड खाने से लोगों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब सरकार जंक फूड उत्पादों पर पैकेट के सामने चेतावनी लेबल लगाने में इच्छुक नहीं दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि अधिक नमक, चीनी, संतृप्त वसा और कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद करने के लिए स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी प्रदर्शित करना आवश्यक है।
जंक फूड से बढ़ रही मोटापे की समस्या
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) के अनुसार, भारत के अति-प्रसंस्कृत खाद्य बाजार में 2009 और 2023 के बीच 150 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि मोटापे में कथित तौर पर पांच गुना तक वृद्धि देखी गई है।