1. हिन्दी समाचार
  2. मध्य प्रदेश
  3. एमपी में बजा सहकारिता चुनाव का बिगुल….पांच चरणों में कराए जाएंगे

एमपी में बजा सहकारिता चुनाव का बिगुल….पांच चरणों में कराए जाएंगे

आखिरकार मध्यप्रदेश में सहकारिता समितियों के चुनाव होने का ऐलान कर दिया गया है। लगभग आठ वर्षों के बाद ये चुनाव होंगे।

By Shital Kumar 
Updated Date

भोपाल। आखिरकार मध्यप्रदेश में सहकारिता समितियों के चुनाव होने का ऐलान कर दिया गया है। लगभग आठ वर्षों के बाद ये चुनाव होंगे। पांच चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर 1 मई से 7 सितंबर तक की तारीख रहेगी। बता दें कि ये चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे और समितियों से प्रदेश भर में कोई पचास लाख से अधिक किसान जुड़े हुए है।

पढ़ें :- Indore Water Contamination : 26 पानी के सैंपल में मिला बैक्टीरियल संक्रमण, NHRC ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो हफ़्ते के अंदर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

 

कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी

हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इन चुनावों को प्राथमिकता दी है। महाधिवक्ता ने इसे अतिआवश्यक बताते हुए पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है, जो एक मई से सात सितंबर 2025 के बीच होंगे। यह चुनाव गैर दलीय आधार पर होंगे, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भले ही सहकारिता चुनाव गैर दलीय आधार पर होते हों, लेकिन राजनीतिक दलों की इसमें गहरी दिलचस्पी रहती है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्रियों भगवान सिंह यादव और अरुण यादव के नेतृत्व में एक समिति बनाई है, वहीं, भाजपा का सहकारिता प्रकोष्ठ भी अपने समर्थकों को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य संस्थाओं में प्रतिनिधि बनाने के लिए सक्रिय है। दोनों दल गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक सहकारी संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं।

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई कदम

पढ़ें :- Indore Contaminated Water Case : हाईकोर्ट ने मोहन यादव सरकार को लगाई फटकार, कहा- ये गंभीर लापरवाही है

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सदस्यता सूची प्रकाशन के बाद विशेष साधारण सम्मेलन बुलाकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चयन होगा। पांच चरणों का कार्यक्रम इस प्रकार है- पहला चरण (1 मई-23 जून), दूसरा चरण (13 मई-4 जुलाई), तीसरा चरण (23 जून-22 अगस्त), चौथा चरण (5 जुलाई-31 अगस्त), और पांचवां चरण (14 जुलाई-7 सितंबर)। यह प्रक्रिया समितियों के पुर्नगठन और किसानों की सहभागिता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। 50 लाख से अधिक किसानों से जुड़ी ये समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

 

किसानों को कर्ज, बीज और अन्य सुविधाएं बेहतर ढंग से मिलने की उम्मीद

लंबे समय तक चुनाव न होने से इनका संचालन प्रभावित हुआ था। अब नई संचालक मंडल की नियुक्ति से किसानों को कर्ज, बीज और अन्य सुविधाएं बेहतर ढंग से मिलने की उम्मीद है। यह चुनाव सहकारिता क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण में उन समितियों को शामिल किया जाएगा, जो पुर्नगठित हो चुकी हैं। भारत सरकार के सहकारिता क्षेत्र के विस्तार के निर्देशों के कारण पहले पुर्नगठन पर जोर दिया गया, लेकिन अब हाई कोर्ट के दबाव में प्रक्रिया तेज की गई है। निर्वाचन प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी चरणों में व्यवस्थित ढंग से मतदान होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रीकरण व निर्वाचन अधिकारी को सदस्यता सूची सौंपी जाएगी, जिसके बाद दावा-आपत्ति का निराकरण कर अंतिम सूची जारी होगी। महिलाओं के लिए संचालक मंडल में पद आरक्षित होंगे। आमसभा की सूचना के साथ नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पढ़ें :- 'गहरे दु:ख में मेरे शब्द गलत निकल गए...' मंत्री विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता पर दी सफाई, इंदौर में गंदे पानी से मौतों पर पूछा था सवाल
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...